7 October 20267 min readBy Learnijoy Team
बड़े भाई साहब कक्षा 10: स्पर्श भाग 2 अध्याय 8 सार और प्रश्न-उत्तर
प्रेमचंद की कहानी का पूरा सार, दोनों भाइयों का चरित्र, शिक्षा व्यवस्था पर व्यंग्य और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर।
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श भाग 2 का अध्याय 8 "बड़े भाई साहब" (Bade Bhai Sahab) प्रेमचंद की कहानी है। इस लेख में आप कहानी का शुरू से अंत तक सार, दोनों भाइयों का चरित्र, कहानी का संदेश और परीक्षा के लिए उपयोगी प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे। कहानी दो भाइयों के रिश्ते, रटंत शिक्षा की कमियों और किताबी ज्ञान बनाम जीवन के अनुभव की बात करती है।
कहानी की पृष्ठभूमि
यह कहानी छात्रावास (हॉस्टल) में रहने वाले दो भाइयों की है। कहानी छोटा भाई सुनाता है। छोटा भाई नौ वर्ष का है और बड़े भाई साहब चौदह वर्ष के। उम्र में पाँच वर्ष का अंतर है, पर शुरू में बड़े भाई केवल तीन दर्जे आगे हैं।
बड़े भाई साहब मानते थे कि शिक्षा रूपी भवन की बुनियाद बहुत मजबूत होनी चाहिए, इसलिए वे एक साल का काम दो साल में, कभी-कभी तीन साल में करते थे। वे बहुत अध्ययनशील थे और हमेशा किताबें खोलकर बैठे रहते थे। छोटे भाई का मन पढ़ाई में कम और खेल-कूद में अधिक लगता था। बड़े भाई उस पर कड़ी निगरानी रखते और उसे अनुशासन में रखना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते थे।
कहानी का सार: शुरू से अंत तक
डाँट और उपदेश: छोटा भाई खेलकर लौटता तो बड़े भाई का पहला सवाल होता— "कहाँ थे?" छोटे भाई की खामोशी ही उसका अपराध मान लेती थी। बड़े भाई समझाते कि अंग्रेजी पढ़ना हँसी-खेल नहीं है, इसके लिए दिन-रात आँखें फोड़नी और खून जलाना पड़ता है। वे कहते कि खेल में समय बर्बाद करके दादा की मेहनत की कमाई व्यर्थ मत गँवाओ।
टाइम-टेबल: डाँट सुनकर छोटा भाई जोश में सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक का कठोर टाइम-टेबल बनाता। उसमें अंग्रेजी, हिसाब, इतिहास, भूगोल और व्याकरण के लिए समय तय होता, पर खेल के लिए एक मिनट भी नहीं। उदाहरण के लिए, प्रातः 6 से 8 बजे तक अंग्रेजी और 8 से 9 बजे तक हिसाब। पर मैदान की हरियाली, फुटबॉल की उछाल और वॉलीबॉल की फुर्ती उसे खींच लेती और वह टाइम-टेबल भूल जाता।
पहली वार्षिक परीक्षा: परिणाम आया तो बड़े भाई फेल हो गए और छोटा भाई अपनी कक्षा में प्रथम आया। अब दोनों में दो दर्जे का अंतर रह गया। छोटे भाई के मन में अभिमान आ गया और वह बेखौफ होकर खेलने लगा। बड़े भाई ने भाँप लिया और रावण का उदाहरण दिया— वह चक्रवर्ती राजा था, देवता भी उसे कर देते थे, पर घमंड ने उसका नामोनिशान मिटा दिया।
शिक्षा पर व्यंग्य: बड़े भाई इतिहास में दर्जनों हेनरी और विलियम के नाम याद रखने, ज्यामिति में 'अ ब ज' की जगह 'अ ज ब' लिखने पर नंबर कटने और 'समय की पाबंदी' पर चार पन्नों का निबंध लिखवाने को छात्रों पर अत्याचार बताते हैं।
अनुभव की सीख और पतंग वाला अंत
अगले साल फिर छोटा भाई पास हुआ और बड़े भाई फेल। अब दोनों में केवल एक दर्जे का अंतर रह गया। बड़े भाई का लहजा नरम हो गया, पर उन्होंने एक बड़ी सीख दी— तुम मेरे दर्जे के पास आ गए हो, पर मैं तुमसे पाँच साल बड़ा हूँ और हमेशा रहूँगा। उन्होंने अनुभव को किताबी ज्ञान से श्रेष्ठ बताया। अम्मा, दादा और हेडमास्टर साहब की माँ का उदाहरण देकर समझाया कि कम पढ़े लोग भी दुनिया का तजुर्बा अधिक रखते हैं और बीमारी या घर का खर्च बेहतर संभालते हैं।
एक शाम छोटा भाई कटी पतंग के पीछे दौड़ रहा था, तभी बड़े भाई से सामना हो गया। उन्होंने उसे बाजार के लड़कों के साथ दौड़ने पर डाँटा। फिर उन्होंने माना कि उनका मन भी पतंग उड़ाने को ललचाता है, पर अगर वे खुद बेराह चलेंगे तो छोटे भाई की रक्षा कैसे करेंगे। तभी एक कटी पतंग ऊपर से गुजरी। लंबे होने के कारण बड़े भाई ने उसकी डोर पकड़ ली और हॉस्टल की ओर दौड़ पड़े। छोटा भाई उनके पीछे दौड़ रहा था।
पात्रों का चरित्र-चित्रण
| बड़े भाई साहब | छोटा भाई |
|---|---|
| अध्ययनशील, हमेशा किताबें लेकर बैठे रहते हैं | पढ़ाई से अधिक खेल-कूद में मन लगता है |
| हमेशा पढ़ते रहते हैं, फिर भी दो बार फेल होते हैं | कम पढ़कर भी दोनों बार पास होता है |
| अनुशासन-प्रिय और उपदेश देने वाले | डाँट से दुखी होकर जोश में नया टाइम-टेबल बनाता है |
| छोटे भाई के लिए अपनी इच्छाएँ दबाते हैं | सफलता से अभिमानी हो जाता है, पर भाई की उदासी पर सहानुभूति भी रखता है |
अंत से पता चलता है कि बड़े भाई का कठोर व्यवहार छोटे भाई के प्रति उनकी चिंता और कर्तव्य-भावना का परिणाम था। उनके भीतर भी एक बच्चा था जो खेलना चाहता था।
कहानी का संदेश
- परीक्षा में अच्छे अंक लाना ही बुद्धिमानी नहीं है; असली चीज़ बुद्धि का विकास और विषय को समझना है।
- रटंत विद्या पर टिकी शिक्षा प्रणाली पर कहानी तीखा व्यंग्य करती है।
- जीवन का अनुभव भी किताबी ज्ञान जितना, बल्कि उससे अधिक, जरूरी है।
- अहंकार विनाश की ओर ले जाता है।
- कहानी अनुशासन, अनुभव और सहज बचपन के बीच के तनाव को हास्य के साथ दिखाती है।
| किताबी ज्ञान | जीवन का अनुभव |
|---|---|
| स्कूल-कॉलेज में मिलता है | जीवन की परिस्थितियों से मिलता है |
| परीक्षा पास करने में सहायक | संकट में सही निर्णय लेने में सहायक |
| डिग्री और पद दिलाता है | सम्मान और समझदारी बढ़ाता है |
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. दोनों भाइयों की उम्र और कक्षा में क्या अंतर था? उत्तर: छोटा भाई नौ वर्ष का और बड़ा भाई चौदह वर्ष का था, यानी उम्र में पाँच वर्ष का अंतर था। कहानी के आरंभ में बड़े भाई तीन दर्जे आगे थे।
प्रश्न 2. बड़े भाई साहब अंग्रेजी की पढ़ाई के बारे में क्या सोचते थे? उत्तर: वे मानते थे कि अंग्रेजी पढ़ना बहुत कठिन है। इसके लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करनी और खून जलाना पड़ता है। उनके अनुसार बड़े-बड़े विद्वान भी शुद्ध अंग्रेजी नहीं लिख पाते।
प्रश्न 3. छोटा भाई अपने टाइम-टेबल का पालन क्यों नहीं कर पाता था? उत्तर: मैदान की सुखद हरियाली, खेल का उत्साह और साथियों का साथ उसे इतना आकर्षित करता था कि वह पढ़ाई और टाइम-टेबल दोनों भूल जाता था।
प्रश्न 4. पहली परीक्षा के बाद छोटे भाई के व्यवहार में क्या बदलाव आया? उत्तर: उसमें आत्मविश्वास के साथ अहंकार भी बढ़ गया। उसे लगा कि उसकी तकदीर बलवान है और वह पढ़े या न पढ़े, पास हो ही जाएगा। इसलिए उसने पढ़ाई कम कर दी और खेल में अधिक समय बिताने लगा।
प्रश्न 5. बड़े भाई ने रावण का उदाहरण क्यों दिया? उत्तर: छोटे भाई का अभिमान दूर करने के लिए। रावण चक्रवर्ती राजा था, देवता भी उसे कर देते थे, फिर भी घमंड ने उसका नामोनिशान मिटा दिया। यहाँ रावण अहंकार के बुरे परिणाम का प्रतीक है।
प्रश्न 6. बड़े भाई ने इतिहास और ज्यामिति की पढ़ाई को कठिन क्यों बताया? उत्तर: क्योंकि इनमें रटने पर अधिक जोर था। इतिहास में एक जैसे नाम याद रखना और ज्यामिति में अक्षरों का क्रम बदलने पर अंक कट जाना उन्हें तर्कहीन लगता था।
प्रश्न 7. बड़े भाई ने अनुभव को किताबी ज्ञान से बड़ा सिद्ध करने के लिए कौन-से उदाहरण दिए? उत्तर: उन्होंने अम्मा और दादा का उदाहरण दिया कि वे पढ़े-लिखे न होकर भी दुनिया की समझ अधिक रखते हैं। साथ ही हेडमास्टर साहब की माँ का उदाहरण दिया, जो एक हजार रुपये कमाने वाले बेटे से बेहतर घर चलाती थीं।
प्रश्न 8. कहानी के अंत में बड़े भाई साहब ने पतंग क्यों पकड़ी? उत्तर: बड़े भाई के भीतर भी एक बच्चा था जो खेलना चाहता था। कटी पतंग देखकर वे अपनी भावना रोक नहीं पाए और लंबाई का लाभ उठाकर डोर पकड़ ली। इससे पता चलता है कि उनकी कठोरता केवल छोटे भाई की चिंता के कारण थी।
उत्तर लिखने का तरीका
बड़े प्रश्न में पहले मुख्य बात (दावा) लिखें, फिर कहानी से साक्ष्य दें और अंत में व्याख्या करें। जैसे, शिक्षा व्यवस्था वाले प्रश्न में दावा— कहानी रटंत विद्या पर व्यंग्य है; साक्ष्य— नाम रटना, ज्यामिति में अंक कटना, चार पन्नों का निबंध; व्याख्या— ऐसी शिक्षा परीक्षा पास कराने पर केंद्रित है, समझ विकसित करने पर नहीं।
पूरी कहानी NCERT की पाठ्यपुस्तक में पढ़ी जा सकती है। इस कहानी को और अच्छी तरह समझने के लिए Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।