7 October 20269 min readBy Learnijoy Team

जैव प्रक्रम कक्षा 10: आसान नोट्स और महत्वपूर्ण प्रश्न

पोषण, श्वसन, वहन और उत्सर्जन को क्रम से सरल भाषा में समझें, साथ में याद रखने योग्य बातें और आदर्श उत्तर।

जैव प्रक्रम (Jaiv Prakram) कक्षा 10 विज्ञान का वह अध्याय है जो बताता है कि जीव जीवित कैसे रहते हैं। इस लेख में आप पोषण, श्वसन, वहन और उत्सर्जन को अध्याय के क्रम में सरल भाषा में पढ़ेंगे, साथ ही ज़रूरी शब्द, याद रखने योग्य बातें, महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर और आम गलतियाँ भी देखेंगे।

जैव प्रक्रम क्या हैं?

जीव अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जो मूल कार्य करते हैं, उन्हें जैव प्रक्रम कहते हैं: पोषण, श्वसन, वहन और उत्सर्जन। जब हम सो रहे होते हैं, तब भी शरीर के भीतर रख-रखाव का काम चलता रहता है।

जीव ऊतकों, कोशिकाओं और कोशिकांगों से बनी अत्यंत व्यवस्थित संरचनाएँ हैं। पर्यावरण इस व्यवस्था को तोड़ने की ओर काम करता है, इसलिए जीवों को लगातार मरम्मत करनी पड़ती है। ये संरचनाएँ अणुओं से बनी हैं, इसलिए अणुओं की गति जीवन की मूल आवश्यकता है।

एककोशिकीय जीवों में पूरी सतह पर्यावरण के संपर्क में रहती है, इसलिए साधारण विसरण से काम चल जाता है। बहुकोशिकीय जीवों में अधिकतर कोशिकाएँ बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में नहीं होतीं, इसलिए विसरण बहुत धीमा पड़ता है और विशेष तंत्रों की ज़रूरत होती है।

स्वपोषी पोषण: प्रकाशसंश्लेषण

हरे पौधे और कुछ जीवाणु स्वपोषी हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल लेकर सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज़) बनाते हैं। अतिरिक्त ग्लूकोज़ मंड (स्टार्च) के रूप में संचित होता है।

समीकरण: 6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O (सूर्य का प्रकाश और क्लोरोफिल)

प्रकाशसंश्लेषण के तीन चरण हैं:

  1. क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण।
  2. प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में बदलना और जल के अणुओं का हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूटना।
  3. कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन।

ये चरण हमेशा एक के तुरंत बाद नहीं होते। मरुस्थलीय पौधे रात में कार्बन डाइऑक्साइड लेकर एक मध्यवर्ती यौगिक बनाते हैं, जिस पर दिन में क्लोरोफिल द्वारा अवशोषित ऊर्जा कार्य करती है।

रंध्र: पत्तियों की सतह पर छोटे छिद्र। जल द्वार कोशिकाओं में जाता है तो वे फूलकर मुड़ती हैं और छिद्र खुलता है; जल निकलने पर वे सिकुड़ती हैं और छिद्र बंद होता है। इससे पौधा जल बचा पाता है। पौधे मिट्टी से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, लोहा और मैग्नीशियम भी लेते हैं; नाइट्रोजन प्रोटीन बनाने के लिए आवश्यक है।

विषमपोषी पोषण और मानव पाचन

विषमपोषी जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते। मृतजीवी (जैसे ब्रेड मोल्ड, यीस्ट, मशरूम) भोजन को शरीर के बाहर तोड़कर अवशोषित करते हैं। परजीवी (जैसे अमरबेल, किलनी, जोंक) परपोषी को मारे बिना उससे पोषण लेते हैं।

अमीबा कूटपादों से भोजन को घेरकर खाद्य रिक्तिका बनाता है। पैरामीशियम का आकार निश्चित होता है; वह पक्ष्माभों से भोजन को एक निश्चित स्थान तक ले जाता है।

मानव पाचन:

  • मुख: दाँत भोजन पीसते हैं। लार में लार एमिलेस एंजाइम होता है, जो मंड को सरल शर्करा में तोड़ता है।
  • ग्रसिका: क्रमाकुंचन (आहारनाल की पेशियों के लयबद्ध संकुचन) से भोजन आगे बढ़ता है।
  • आमाशय: जठर ग्रंथियाँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पेप्सिन और श्लेष्मा छोड़ती हैं। अम्ल पेप्सिन के लिए अम्लीय माध्यम बनाता है; श्लेष्मा आमाशय के आंतरिक स्तर की रक्षा करता है।
  • क्षुद्रांत्र: यकृत से पित्त रस भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा का इमल्सीकरण करता है। अग्न्याशयिक रस में ट्रिप्सिन (प्रोटीन) और लाइपेज (वसा) होते हैं। अंत में प्रोटीन अमीनो अम्ल में, जटिल कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज़ में और वसा वसा-अम्ल व ग्लिसरॉल में बदलते हैं।
  • दीर्घरोम (विलाई): क्षुद्रांत्र की अँगुली जैसी संरचनाएँ जो अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ाती हैं।
  • बृहदांत्र: यहाँ जल का पुनः अवशोषण होता है।

श्वसन

श्वसन में भोजन के अणु टूटकर ऊर्जा देते हैं, जो ATP के रूप में संचित होती है। ATP कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है।

पहला चरण हमेशा कोशिकाद्रव्य में होता है: छह कार्बन वाला ग्लूकोज़ तीन कार्बन वाले पायरुवेट में टूटता है। आगे का मार्ग ऑक्सीजन पर निर्भर करता है:

मार्गस्थितिअंतिम उत्पादऊर्जा
वायवीय (माइटोकॉन्ड्रिया में)ऑक्सीजन उपस्थितCO₂ + H₂Oअधिक
अवायवीय (यीस्ट)ऑक्सीजन अनुपस्थितइथेनॉल + CO₂कम
पेशी कोशिकाएँऑक्सीजन की कमीलैक्टिक अम्लकम

तेज़ व्यायाम में पेशियों में लैक्टिक अम्ल जमा होने से ऐंठन (क्रैम्प) होती है।

मानव श्वसन तंत्र: नासाद्वार में बाल और श्लेष्मा वायु को छानते हैं। गले में उपास्थि के वलय वायु-मार्ग को पिचकने से रोकते हैं। वायु श्वसनी से फुफ्फुस में जाकर कूपिकाओं तक पहुँचती है। कूपिकाएँ लगभग 80 वर्ग मीटर की सतह देती हैं। साँस लेते समय डायाफ्राम चपटा होता है और पसलियाँ ऊपर उठती हैं। लाल रक्त कोशिकाओं का हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को ऊतकों तक ले जाता है। फुफ्फुस में हमेशा कुछ अवशिष्ट वायु रहती है, ताकि साँसों के बीच भी गैसों का आदान-प्रदान चलता रहे।

वहन: हृदय, रुधिर वाहिकाएँ और पौधे

हृदय में चार कोष्ठ हैं: ऊपर दो अलिंद और नीचे दो निलय। बायाँ भाग ऑक्सीजनित रुधिर और दायाँ भाग विऑक्सीजनित रुधिर संभालता है। निलयों की भित्ति मोटी होती है, क्योंकि उन्हें अधिक दाब से दूर के अंगों तक रुधिर भेजना होता है।

दोहरा परिसंचरण: एक पूरे चक्र में रुधिर हृदय से दो बार गुज़रता है। दायाँ निलय रुधिर को फुफ्फुस धमनी द्वारा फुफ्फुस में भेजता है; ऑक्सीजनित रुधिर फुफ्फुस शिराओं से बाएँ अलिंद में आता है; बायाँ निलय उसे महाधमनी द्वारा शरीर में भेजता है।

लक्षणधमनीशिरा
दिशाहृदय से दूरहृदय की ओर
भित्तिमोटी और लचीलीपतली
वाल्वनहींहोते हैं
दाबअधिककम

केशिकाओं की भित्ति एक कोशिका जितनी मोटी होती है। प्लेटलेट्स चोट लगने पर थक्का बनाकर रुधिर बहना रोकते हैं। लसीका रंगहीन होती है, इसमें प्लाज़्मा से कम प्रोटीन होता है, और यह आँत से पची हुई वसा का वहन करती है। NCERT वयस्क के उदाहरण के रूप में लगभग 120/80 mm Hg रक्तदाब बताता है; इसे मापने वाला यंत्र स्फाइग्मोमैनोमीटर है।

पौधों में वहन: जाइलम मिट्टी से जल और खनिज ऊपर ले जाता है; इसमें मूल दाब और वाष्पोत्सर्जन खिंचाव काम करते हैं। फ्लोएम पत्तियों से सुक्रोज़ और अमीनो अम्ल जैसे पदार्थों का स्थानांतरण करता है। स्थानांतरण में ATP के रूप में ऊर्जा लगती है और यह ऊपर-नीचे दोनों दिशाओं में हो सकता है।

उत्सर्जन

मानव उत्सर्जन तंत्र में एक जोड़ी वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग होते हैं। वृक्क की छानने वाली इकाई वृक्काणु (नेफ्रॉन) है।

  1. निस्यंदन: केशिका गुच्छ (ग्लोमेरुलस) में रुधिर छनता है और निस्यंद बोमन संपुट में आता है।
  2. चयनात्मक पुनरवशोषण: ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल और जल वापस रुधिर में जाते हैं।
  3. मूत्र संग्रह: बचा द्रव मूत्रवाहिनी से मूत्राशय में जाता है और मूत्रमार्ग से बाहर निकलता है।

पाठ्यपुस्तक तुलना देती है: स्वस्थ वयस्क में प्रतिदिन लगभग 180 लीटर प्रारंभिक निस्यंद बनता है, पर मूत्र केवल लगभग 1–2 लीटर होता है। अधिकतर जल वापस रुधिर में चला जाता है।

कृत्रिम वृक्क (अपोहन): इसमें चयनात्मक पुनरवशोषण नहीं होता। पौधों में उत्सर्जन: ऑक्सीजन रंध्रों से, अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन से; कुछ अपशिष्ट गिरने वाली पत्तियों में, या पुराने जाइलम में रेज़िन और गोंद के रूप में संचित होते हैं।

याद रखें

  • चार जैव प्रक्रम: पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन।
  • ग्लूकोज़ से पायरुवेट: हमेशा कोशिकाद्रव्य में।
  • पेप्सिन अम्लीय माध्यम में, ट्रिप्सिन क्षारीय माध्यम में काम करता है।
  • पित्त रस अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा का इमल्सीकरण करता है।
  • जाइलम: जल, ऊपर की ओर। फ्लोएम: भोजन, दोनों दिशाओं में, ATP चाहिए।

महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. बहुकोशिकीय जीवों के लिए विसरण पर्याप्त क्यों नहीं है? उत्तर: इनका शरीर बड़ा और जटिल है। अधिकतर कोशिकाएँ बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में नहीं होतीं, इसलिए विसरण से गहरे ऊतकों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व समय पर नहीं पहुँच पाते।

प्रश्न 2. रंध्र कैसे खुलते और बंद होते हैं? उत्तर: जल द्वार कोशिकाओं में आने पर वे फूलकर मुड़ती हैं और छिद्र खुलता है। जल निकलने पर वे सिकुड़ती हैं और छिद्र बंद हो जाता है।

प्रश्न 3. आमाशय अपने ही अम्ल से नष्ट क्यों नहीं होता? उत्तर: जठर ग्रंथियाँ श्लेष्मा स्रावित करती हैं, जो आंतरिक स्तर पर सुरक्षा परत बनाता है।

प्रश्न 4. शाकाहारी और मांसाहारी जीवों की क्षुद्रांत्र की लंबाई में क्या अंतर है? उत्तर: गाय जैसे शाकाहारियों की क्षुद्रांत्र लंबी होती है ताकि सेलुलोज़ का पाचन हो सके। बाघ जैसे मांसाहारियों की क्षुद्रांत्र छोटी होती है, क्योंकि मांस का पाचन आसान है।

प्रश्न 5. वायवीय और अवायवीय श्वसन में दो अंतर लिखिए। उत्तर: वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में माइटोकॉन्ड्रिया में होता है और CO₂ व जल बनाकर अधिक ऊर्जा देता है। यीस्ट में अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन के बिना होता है और इथेनॉल व CO₂ बनाकर कम ऊर्जा देता है।

प्रश्न-उत्तर: वहन और उत्सर्जन

प्रश्न 6. निलयों की भित्ति अलिंदों से मोटी क्यों होती है? उत्तर: निलयों को रुधिर हृदय से बाहर फुफ्फुस या पूरे शरीर तक भेजना होता है, जिसके लिए अधिक दाब चाहिए।

प्रश्न 7. शिराओं में वाल्व का क्या कार्य है? उत्तर: वाल्व रुधिर को केवल हृदय की ओर बहने देते हैं और कम दाब में उसे उल्टा बहने से रोकते हैं।

प्रश्न 8. जाइलम और फ्लोएम में वहन कैसे भिन्न है? उत्तर: जाइलम में जल का वहन मुख्यतः वाष्पोत्सर्जन खिंचाव जैसे भौतिक बलों से होता है और केवल ऊपर की ओर होता है। फ्लोएम में स्थानांतरण के लिए ATP की ऊर्जा चाहिए और यह ऊपर-नीचे दोनों दिशाओं में होता है।

प्रश्न 9. अपोहन (कृत्रिम वृक्क) स्वस्थ वृक्क से कैसे भिन्न है? उत्तर: दोनों रुधिर से नाइट्रोजनी अपशिष्ट हटाते हैं, पर स्वस्थ वृक्क ग्लूकोज़ और जल जैसे उपयोगी पदार्थों का चयनात्मक पुनरवशोषण करता है, जबकि अपोहन में पुनरवशोषण नहीं होता।

आम गलतियाँ

  • पित्त रस के दो कार्यों में से एक भूल जाना: वह भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा का इमल्सीकरण भी करता है।
  • यह लिखना कि ग्लूकोज़ का पहला विखंडन माइटोकॉन्ड्रिया में होता है। पहला चरण कोशिकाद्रव्य में होता है।
  • धमनी और शिरा की दिशा उलट देना।
  • प्रकाशसंश्लेषण के समीकरण में दाईं ओर के 6H₂O को भूल जाना।

इस अध्याय को अभ्यास के साथ और गहराई से समझने के लिए Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।