1 November 20268 min readBy Learnijoy Team

कारतूस कक्षा 10: सार, पात्र और प्रश्न-उत्तर

हबीब तनवीर की एकांकी का पूरा सार, वज़ीर अली का चरित्र, कठिन शब्द और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर।

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श भाग 2 का अध्याय 14 "कारतूस" (Kartoos) हबीब तनवीर की लिखी एकांकी है। यह अवध के नवाब रहे वज़ीर अली की कहानी है, जो अंग्रेज़ों के खेमे में अकेला पहुँचकर उन्हीं के कर्नल से कारतूस ले जाता है। यहाँ आप लेखक परिचय, पूरा सार, पात्रों का चरित्र, कठिन शब्द और प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे।

CBSE 2026-27: यह पाठ हिंदी पाठ्यक्रम ब (085) की पुस्तक स्पर्श भाग 2 का है। 2026-27 में स्पर्श से केवल बिहारी के दोहे, "मधुर-मधुर मेरे दीपक जल" और "गिरगिट" पर प्रश्न नहीं पूछे जाएँगे। "कारतूस" इस सूची में नहीं है, इसलिए यह बोर्ड परीक्षा में शामिल है। पूरी जानकारी के लिए हमारी CBSE कक्षा 10 पाठ्यक्रम 2026-27 गाइड देखें।

लेखक परिचय: हबीब तनवीर

हबीब तनवीर (1923-2009) का जन्म छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ। उन्होंने ब्रिटेन की नाटक अकादमी से नाट्य-लेखन का अध्ययन किया और दिल्ली लौटकर पेशेवर नाट्यमंच की स्थापना की। वे नाटककार, कवि, पत्रकार, नाट्य निर्देशक और अभिनेता थे और लोकनाट्य में उनका काम महत्त्वपूर्ण है। उन्हें पद्मश्री सहित कई सम्मान मिले।

  • प्रमुख नाटक: आगरा बाज़ार, चरनदास चोर, देख रहे हैं नैन, हिरमा की अमर कहानी।
  • आधुनिक रूपांतर: बसंत ऋतु का सपना, शाजापुर की शांति बाई, मिट्टी की गाड़ी, मुद्राराक्षस।

एकांकी की पृष्ठभूमि

ईस्ट इंडिया कंपनी रियासतों पर कब्ज़ा जमा रही थी। वज़ीर अली का एकमात्र लक्ष्य अंग्रेज़ों को देश से बाहर करना था।

विवरणएकांकी में
पात्रकर्नल, लेफ़्टीनेंट, सिपाही, सवार
अवधि5 मिनट
ज़मानासन् 1799
समयरात्रि का
स्थानगोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिंज के खेमे का अंदरूनी हिस्सा

सार: कर्नल और लेफ़्टीनेंट की बातचीत

जंगल का खेमा: अंग्रेज़ हफ़्तों से वज़ीर अली को पकड़ने के लिए जंगल में खेमा डाले हैं। सिपाही तंग आ चुके हैं; लेफ़्टीनेंट कहता है कि वज़ीर अली आदमी है या भूत, हाथ ही नहीं लगता।

रॉबिनहुड की याद: कर्नल कहता है कि वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर रॉबिनहुड के कारनामे याद आ जाते हैं। उसके दिल में अंग्रेज़ों के खिलाफ़ गहरी नफ़रत है और कोई पाँच महीने की हुकूमत में उसने अवध के दरबार को अंग्रेज़ी असर से लगभग मुक्त कर दिया।

सआदत अली: वह नवाब आसिफ़उद्दौला का भाई और वज़ीर अली का दुश्मन था। अंग्रेज़ों ने उसे अवध के तख्त पर बिठाया, क्योंकि वह उनका दोस्त और ऐश-पसंद आदमी था और उसने उन्हें अपनी आधी जायदाद और दस लाख रुपये नकद दिए।

अंग्रेज़ों के खिलाफ़ लहर: अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-ज़माँ को हिंदुस्तान पर हमले की दावत सबसे पहले टीपू सुल्तान ने दी, फिर वज़ीर अली ने उसे दिल्ली बुलाया और फिर शमसुद्दौला (नवाब बंगाल का निस्बती यानी रिश्ते का भाई) ने भी। लेफ़्टीनेंट को लगता है कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है। कर्नल मानता है कि यह लहर कामयाब हुई तो बक्सर और प्लासी के कारनामे धरे रह जाएँगे और कंपनी ने लॉर्ड क्लाइव के हाथों जो पाया, वह लॉर्ड वेल्ज़ली के हाथों खो बैठेगी। कर्नल बताता है कि वह पूरी फ़ौज लेकर वज़ीर अली का पीछा कर रहा है, पर वज़ीर अली बरसों से उनकी आँखों में धूल झोंक रहा है: "मुट्ठी भर आदमी मगर ये दमखम है।"

वकील का कत्ल: पद से हटाकर अंग्रेज़ों ने वज़ीर अली को तीन लाख रुपये सालाना वज़ीफ़े पर बनारस भेज दिया। कुछ महीने बाद गवर्नर जनरल ने उसे कलकत्ता बुलाया। उसने बनारस में कंपनी के वकील से शिकायत की, पर वकील ने उलटे उसे बुरा-भला सुना दिया। वज़ीर अली ने खंजर से वकील का काम तमाम कर दिया।

भागना और योजना: वह साथियों के साथ आज़मगढ़ भागा, जहाँ के हुक्मराँ ने उन्हें अपनी हिफ़ाज़त में घाघरा तक पहुँचा दिया। अब यह कारवाँ कई साल से इन्हीं जंगलों में भटक रहा है। उसकी स्कीम है कि नेपाल पहुँचे, अफ़गानी हमले का इंतज़ार करे, ताकत बढ़ाए, सआदत अली को हटाकर अवध पर कब्ज़ा करे और अंग्रेज़ों को निकाल दे।

सार: सवार का आगमन और नाटकीय अंत

दूर से गर्द उठती है। लेफ़्टीनेंट कहता है कि गर्द ऐसे उड़ रही है जैसे पूरा काफ़िला आ रहा हो, पर सवार एक ही है। कर्नल सिपाहियों से उस पर नज़र रखने को कहता है। सवार सीधा खेमे पर आकर कर्नल से मिलना चाहता है। लेफ़्टीनेंट सोचता है कि यह वज़ीर अली का कोई आदमी होगा जो उसे पकड़वाना चाहता है।

अंदर आते ही सवार "तन्हाई! तन्हाई!" पुकारता है। कर्नल कहता है कि यहाँ कोई गैर आदमी नहीं है, पर सवार कहता है, "दीवार हमगोश दारद" (दीवारों के भी कान होते हैं)। कर्नल के इशारे पर लेफ़्टीनेंट और सिपाही बाहर चले जाते हैं।

कर्नल बताता है कि कंपनी का हुक्म वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने का है। सवार कहता है कि यह बहुत मुश्किल है, क्योंकि वह एक जाँबाज़ सिपाही है। फिर वह वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए "चंद कारतूस" माँगता है। कर्नल उसे दस कारतूस दे देता है।

सवार मुसकराकर "शुक्रिया" कहता है। नाम पूछने पर वह कहता है, "वज़ीर अली। आपने मुझे कारतूस दिए इसलिए आपकी जान बख्शी करता हूँ।" वह बाहर चला जाता है और टापों का शोर सुनाई देता है। कर्नल सन्नाटे में हक्का-बक्का खड़ा रह जाता है। लेफ़्टीनेंट अंदर आकर पूछता है, "कौन था?" कर्नल दबी ज़बान से अपने आप से कहता है, "एक जाँबाज़ सिपाही।"

पात्रों का चरित्र-चित्रण

वज़ीर अलीकर्नल कालिंज
निडर: दुश्मन के खेमे में अकेला पहुँचता हैअनुभवी अंग्रेज़ अधिकारी, कंपनी का हुक्म मानने वाला
चतुर: पहचान छिपाकर कर्नल से ही कारतूस ले लेता हैबरसों पीछा करके भी वज़ीर अली को पहचान नहीं पाता
स्वाभिमानी: वकील का अपमान सहन नहीं करताशत्रु की वीरता मानता है, उसे "जाँबाज़ सिपाही" कहता है

भाषा, शिल्प और कठिन शब्द

भाषा में उर्दू शब्द बहुत हैं, जो उस समय का माहौल जीवंत बनाते हैं। सवार की पहचान आखिर तक छिपी रहने से उत्सुकता बनी रहती है। "आँखों में धूल झोंकना", "काम तमाम कर देना" और "हक्का-बक्का रह जाना" जैसे मुहावरे संवादों को असरदार बनाते हैं।

शब्दअर्थ
खेमाडेरा, अस्थायी पड़ाव
मसलेहतरहस्य
जाँबाज़जान की बाज़ी लगाने वाला
दमखमशक्ति और दृढ़ता
तन्हाईएकांत
कारतूसपीतल और दफ़्ती आदि की एक नली जिसमें गोली तथा बारूद भरी रहती है

याद रखें

  • ज़माना सन् 1799; स्थान गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिंज का खेमा।
  • वज़ीर अली ने लगभग पाँच महीने हुकूमत की।
  • सआदत अली ने अंग्रेज़ों को आधी जायदाद और दस लाख रुपये नकद दिए।
  • कर्नल ने सवार को दस कारतूस दिए।

महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था? उत्तर: वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए, क्योंकि वह इन्हीं जंगलों में छिपकर भटक रहा था।

प्रश्न 2. सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा? उत्तर: सआदत अली नवाब आसिफ़उद्दौला का भाई था। आसिफ़उद्दौला के यहाँ लड़के की उम्मीद नहीं थी, इसलिए गद्दी सआदत अली को मिल सकती थी। वज़ीर अली के जन्म से यह आशा खत्म हो गई।

प्रश्न 3. सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था? उत्तर: सआदत अली अंग्रेज़ों का दोस्त और ऐश-पसंद था। उसने उन्हें आधी जायदाद और दस लाख रुपये नकद दिए। कर्नल के शब्दों में, "अब वो भी मज़े करता है और हम भी।"

प्रश्न 4. वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया? उत्तर: गवर्नर जनरल के कलकत्ता बुलाने पर वज़ीर अली ने बनारस में कंपनी के वकील से शिकायत की। वकील ने परवाह नहीं की, उलटे उसे बुरा-भला सुनाया। अंग्रेज़ों के प्रति पहले से भरी नफ़रत और इस अपमान के कारण उसने खंजर से वकील को मार डाला।

प्रश्न 5. लेफ़्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है? उत्तर: क्योंकि टीपू सुल्तान, वज़ीर अली और बंगाल के नवाब के रिश्ते के भाई शमसुद्दौला, तीनों ने अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-ज़माँ को हिंदुस्तान पर हमले की दावत दी थी।

प्रश्न 6. सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए? उत्तर: सवार ने पहचान छिपाकर तन्हाई में कर्नल से बात की और कहा कि वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए उसे कुछ कारतूस चाहिए। कर्नल ने उसे मददगार समझकर दस कारतूस दे दिए।

प्रश्न 7. "वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था।" स्पष्ट कीजिए। उत्तर: वज़ीर अली ने पाँच महीने के शासन में अवध के दरबार को अंग्रेज़ी असर से लगभग मुक्त कर दिया। बरसों तक मुट्ठी भर साथियों के साथ वह अंग्रेज़ों की पूरी फ़ौज की आँखों में धूल झोंकता रहा। अंत में अकेला दुश्मन के खेमे में जाकर कर्नल से ही कारतूस ले आया और नाम बताकर सुरक्षित निकल गया। इसलिए दुश्मन कर्नल को भी उसे "जाँबाज़ सिपाही" कहना पड़ा।

इन गलतियों से बचें

  • सआदत अली को वज़ीर अली का भाई लिखना। वह आसिफ़उद्दौला का भाई, यानी वज़ीर अली का चाचा था।
  • यह लिखना कि शाहे-ज़माँ को सबसे पहले वज़ीर अली ने बुलाया। पाठ के अनुसार सबसे पहले टीपू सुल्तान ने दावत दी।
  • "दीवार हमगोश दारद" कर्नल का वाक्य बताना। यह सवार (वज़ीर अली) कहता है।

इस एकांकी को और अच्छी तरह समझने के लिए Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।

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