7 October 20266 min readBy Learnijoy Team

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद कक्षा 10: सार और प्रश्न-उत्तर

तुलसीदास के इस प्रसंग का क्रम से सार, तीनों पात्रों का स्वभाव, अलंकार, छंद और बोर्ड परीक्षा के लिए आदर्श उत्तर।

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (Ram Lakshman Parshuram Samvad) कक्षा 10 की क्षितिज भाग 2 पुस्तक का पाठ है, जो तुलसीदास के 'रामचरितमानस' के बालकांड से लिया गया है। इस लेख में आप प्रसंग, पूरे संवाद का क्रम से सार, तीनों पात्रों का स्वभाव, भाषा और अलंकार, तथा बोर्ड परीक्षा के लिए आदर्श प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे।

कवि परिचय: गोस्वामी तुलसीदास

तुलसीदास भक्ति धारा की रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। उनका जन्म 1532 में उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ था और देहावसान 1623 में काशी में हुआ। उनका बचपन संघर्षपूर्ण रहा और कम आयु में ही माता-पिता का वियोग सहना पड़ा।

उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना 'रामचरितमानस' है। कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली और विनयपत्रिका भी उनकी कृतियाँ हैं। उन्होंने अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं में लिखा। 'रामचरितमानस' की मुख्य भाषा अवधी है और इसमें चौपाई तथा दोहा छंद प्रयुक्त हैं।

प्रसंग: शिव-धनुष का टूटना

राजा जनक के दरबार में सीता स्वयंवर हो रहा था। शर्त थी कि जो शिव-धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। श्री राम ने धनुष तोड़ दिया। उसकी भयंकर टंकार सुनकर मुनि परशुराम अत्यंत क्रोधित होकर वहाँ पहुँचते हैं।

परशुराम शिव के अनन्य भक्त थे। अपने आराध्य का धनुष टूटा देखकर वे आपे से बाहर हो जाते हैं और धनुष तोड़ने वाले को अपना शत्रु घोषित करते हैं।

संवाद का सार: क्रम से

1. राम की विनम्रता। परशुराम पूछते हैं कि धनुष किसने तोड़ा। राम शांत भाव से कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा, और आज्ञा माँगते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए।

2. परशुराम का भड़कना। परशुराम कहते हैं कि सेवक वह होता है जो सेवा करे; धनुष तोड़ने वाले ने तो शत्रु जैसा काम (अरि करनी) किया है। वह सहस्रबाहु के समान उनका शत्रु है। वे राजाओं को चेतावनी देते हैं कि उसे अलग कर दें, नहीं तो सभी राजा मारे जाएँगे।

3. लक्ष्मण का व्यंग्य। लक्ष्मण मुस्कुराकर कहते हैं कि बचपन में हमने ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ (छोटे धनुष) तोड़ीं, तब आपने क्रोध नहीं किया; फिर इसी पुराने धनुष पर इतनी ममता क्यों? राम ने तो इसे नया समझकर केवल छुआ था और यह छूते ही टूट गया, इसमें राम का कोई दोष नहीं।

4. परशुराम का आत्म-प्रदर्शन। परशुराम फरसे की ओर देखकर लक्ष्मण को 'काल के वश' बताते हैं। वे कहते हैं कि वे बाल ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हैं, क्षत्रिय कुल के शत्रु हैं, उन्होंने कई बार पृथ्वी को राजाओं से विहीन कर ब्राह्मणों को दान दिया। उनका फरसा इतना भयानक है कि उसकी गर्जना से गर्भ के बच्चों का भी नाश हो जाता है।

5. लक्ष्मण का उत्तर। लक्ष्मण हँसकर कहते हैं कि आप बार-बार फरसा दिखा रहे हैं, जैसे फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हों। यहाँ कोई कुम्हड़बतिया (बहुत कमजोर व्यक्ति) नहीं जो तर्जनी देखकर डर जाए। रघुवंश की परंपरा है कि देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय पर वीरता नहीं दिखाई जाती, क्योंकि इन्हें मारने से पाप और इनसे हारने पर अपयश मिलता है। अंत में वे कटाक्ष करते हैं कि आपके वचन ही करोड़ों वज्रों के समान कठोर हैं, धनुष-बाण और फरसा तो आपने व्यर्थ धारण किए हैं।

पात्रों का स्वभाव

  • श्री राम: शांत, कोमल और विनम्र।
  • लक्ष्मण: निर्भीक, तर्कशील और व्यंग्य करने वाले। उनके वचन वीर रस और व्यंग्य से भरे हैं।
  • परशुराम: शिव के भक्त, अत्यंत क्रोधी और अपनी वीरता का बखान करने वाले।

लक्ष्मण के माध्यम से कवि सच्चे वीर और अभिमानी व्यक्ति का अंतर दिखाते हैं:

गुणसच्चा वीर योद्धाअभिमानी व्यक्ति
धैर्यधैर्यवान और शांतजल्दी क्रोधित
आत्म-प्रशंसाअपनी प्रशंसा नहीं करतावीरता की डींगें हाँकता है
व्यवहारविनम्र और मर्यादितकठोर शब्द बोलता है
युद्धरणभूमि में पराक्रम दिखाता हैकेवल बातों से डराता है

भाषा, रस, अलंकार और छंद

  • भाषा: अवधी। संवाद शैली प्रभावशाली है; पात्रों के स्वभाव के अनुसार भाषा चुनी गई है।
  • रस: वीर रस और रौद्र रस की प्रधानता।
  • अनुप्रास अलंकार: 'बालकु बोलि बधौं नहि तोही' में 'ब' वर्ण की आवृत्ति।
  • उपमा अलंकार: 'कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा' में वचनों की तुलना वज्र (कुलिस) से।
  • व्यंग्य: लक्ष्मण की वक्रोक्ति (टेढ़ी बात) और परशुराम का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन प्रसंग को रोचक बनाते हैं।
  • छंद: दोहे के पहले और तीसरे चरण में 13 तथा दूसरे और चौथे में 11 मात्राएँ होती हैं। चौपाई के प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। मात्रा गिनते समय छोटे-बड़े स्वरों और संयुक्त ध्वनियों का ध्यान रखें; केवल शब्द गिनना पर्याप्त नहीं।

महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. परशुराम के क्रोधित होने का मुख्य कारण क्या था? उत्तर: परशुराम शिव के भक्त थे। अपने आराध्य का धनुष टूट जाने के कारण वे अत्यंत क्रोधित हुए।

प्रश्न 2. राम ने परशुराम का क्रोध शांत करने के लिए क्या कहा? उत्तर: राम ने विनम्रता से कहा कि शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा, और आज्ञा माँगी कि उन्हें क्या करना चाहिए।

प्रश्न 3. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष टूटने के लिए कौन-से तर्क दिए? उत्तर: लक्ष्मण ने धनुष टूटने को साधारण घटना बताया। उन्होंने कहा, 'बहु धनुही तोरी लरिकाईं', यानी बचपन में हमने कई धनुष तोड़े, और 'छुआत टूट रघुपतिहु न दोसू', यानी राम के छूते ही धनुष टूट गया, इसमें उनका दोष नहीं। लक्ष्मण के अनुसार धनुष पुराना और जर्जर था, जिसे राम ने नया समझकर परखा था। अतः परशुराम का क्रोध अनुचित है।

प्रश्न 4. परशुराम ने अपनी वीरता के पक्ष में क्या प्रमाण दिए? उत्तर: उन्होंने कहा कि वे बाल ब्रह्मचारी और क्षत्रिय कुल के शत्रु हैं। उन्होंने अपनी भुजाओं के बल पर पृथ्वी को क्षत्रिय-विहीन कर ब्राह्मणों को दान दिया, सहस्रबाहु की भुजाएँ काट डालीं, और उनका फरसा इतना भयानक है कि उसकी गर्जना से गर्भ के बच्चों का भी नाश हो जाता है।

प्रश्न-उत्तर: लक्ष्मण का उत्तर और शिल्प

प्रश्न 5. 'कुम्हड़बतिया' शब्द का प्रयोग लक्ष्मण ने किस संदर्भ में किया है? उत्तर: कुम्हड़बतिया कुम्हड़े का छोटा फल है; यहाँ यह बहुत कमजोर व्यक्ति का संकेत है। लक्ष्मण कहते हैं कि वे परशुराम की तर्जनी देखकर डरने वाले निर्बल व्यक्ति नहीं हैं।

प्रश्न 6. लक्ष्मण के अनुसार रघुवंश की क्या परंपरा है? उत्तर: रघुवंशी देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय पर वीरता नहीं दिखाते, क्योंकि इन्हें मारने से पाप लगता है और इनसे हारने पर अपयश होता है।

प्रश्न 7. 'कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा' में कौन-सा अलंकार है? उत्तर: उपमा अलंकार, क्योंकि परशुराम के वचनों की तुलना वज्र (कुलिस) से की गई है।

प्रश्न 8. लक्ष्मण के व्यवहार को आप उचित मानते हैं या अनुचित? उत्तर: लक्ष्मण का व्यवहार निर्भीक था, परंतु बड़ों के प्रति उनके वचनों में मर्यादा की कमी थी। उनका यह तर्क सही था कि क्रोध समस्या का समाधान नहीं है, फिर भी विनम्रता अधिक प्रभावशाली होती।

उत्तर लिखने का तरीका

लंबे उत्तर में पहले दावा लिखें, फिर साक्ष्य (पाठ की पंक्ति) और अंत में व्याख्या। प्रश्न 3 का उत्तर इसी ढाँचे में है। यदि आप चौपाई या दोहे की कोई पंक्ति लिखें, तो उसका अर्थ भी स्पष्ट करें।

इस प्रसंग का और अभ्यास करने के लिए Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।