7 October 20266 min readBy Learnijoy Team
संगतकार कक्षा 10: भावार्थ और प्रश्न-उत्तर (क्षितिज अध्याय 6)
मंगलेश डबराल की कविता संगतकार का सरल भावार्थ, संगीत के शब्दों का अर्थ, मुख्य संदेश और प्रश्न-उत्तर।
कक्षा 10 हिंदी क्षितिज भाग 2 का अध्याय 6 संगतकार (Sangatkar) है, जिसे मंगलेश डबराल ने लिखा है। यह कविता उन लोगों की बात करती है जो मुख्य कलाकार के पीछे रहकर, अपनी पहचान छिपाकर, उसे सहारा देते हैं। इस लेख में आप कविता का क्रम से भावार्थ, संगीत के शब्दों का अर्थ, मुख्य संदेश और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे।
कवि परिचय: मंगलेश डबराल
- मंगलेश डबराल आधुनिक हिंदी कविता के महत्त्वपूर्ण कवि हैं। उनका जन्म 1948 में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हुआ।
- शिक्षा देहरादून में हुई। उन्होंने दिल्ली, भोपाल, इलाहाबाद और लखनऊ के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में संपादन का काम किया।
- प्रमुख काव्य कृतियाँ: पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं, आवाज़ भी एक जगह है।
- उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और पहल सम्मान मिले।
- उनकी कविताओं में सामंती बोध और पूँजीवादी छल-छद्म के विरुद्ध सूक्ष्म प्रतिरोध है। वे शोर के बजाय एक सुंदर सपना रचकर विरोध करते हैं। उनकी भाषा पारदर्शी है। सन् 2020 में उनका निधन हुआ।
संगतकार कौन है?
संगतकार वह व्यक्ति है जो मुख्य गायक के साथ गाता है या वाद्य यंत्र बजाता है। कविता सिखाती है कि किसी भी बड़ी सफलता में एक अकेले व्यक्ति का हाथ नहीं होता; उसके पीछे कई लोगों का त्याग और श्रम होता है।
संगतकार कोई भी हो सकता है: मुख्य गायक का छोटा भाई, उसका शिष्य, या कोई दूर का रिश्तेदार जो पैदल चलकर संगीत सीखने आया हो। वह बहुत पहले से अपनी गूँज मुख्य गायक के स्वर में मिलाता आया है।
भावार्थ: चट्टान जैसा स्वर और काँपती आवाज़
कविता की शुरुआत दो आवाज़ों के अंतर से होती है। मुख्य गायक की आवाज़ चट्टान जैसी भारी और गंभीर है। संगतकार की आवाज़ सुंदर, कमज़ोर और थोड़ी काँपती हुई है। आगे कविता दिखाती है कि संगतकार जानबूझकर अपनी आवाज़ को प्रमुख नहीं बनने देता। इसलिए उसकी हिचक को प्रतिभा की कमी समझना ठीक नहीं।
भावार्थ: भटकते गायक को सहारा
गाते समय जब मुख्य गायक अंतरे (गीत का चरण) की जटिल तानों के जंगल में उलझ जाता है, या अपने सुरों की सीमा लाँघकर भटक जाता है, तब संगतकार स्थायी (गीत की मुख्य पंक्ति या टेक) को सँभाले रहता है। वह मानो मुख्य गायक का पीछे छूटा सामान समेटता है और उसे उसके बचपन की याद दिलाता है, जब वह नौसिखिया था।
क्रम ऐसे समझें:
- जटिल तान: मुख्य गायक कठिन स्वरों के विस्तार में खो जाता है।
- भटकाव: वह मूल सुर से दूर निकल जाता है।
- स्थायी का सहारा: संगतकार मुख्य पंक्ति गाकर आधार बनाए रखता है।
- वापसी: मुख्य गायक लौटकर मूल सुर पर आ जाता है।
भावार्थ: तारसप्तक और ढाँढस
जब मुख्य गायक तारसप्तक (ऊँचे स्वरों) में गाता है, तो उसका गला बैठने लगता है और उत्साह घटने लगता है। आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता लगता है, यानी स्वर बुझने लगता है।
ऐसे समय संगतकार कहीं से अपना स्वर मिला देता है। वह मुख्य गायक को ढाँढस (तसल्ली) बँधाता है कि वह अकेला नहीं है, और जो राग गाया जा चुका है उसे फिर से गाया जा सकता है।
संगतकार की मनुष्यता
संगतकार की आवाज़ में एक हिचक साफ़ सुनाई देती है। वह कोशिश करता है कि उसका स्वर मुख्य गायक से ऊँचा न हो जाए। दुनिया इसे उसकी असफलता मान सकती है, पर कवि कहते हैं कि अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की यह कोशिश उसकी विफलता नहीं, उसकी मनुष्यता है। वह अपनी प्रतिभा मुख्य गायक की चमक बढ़ाने में लगा देता है।
जीवन में संगतकार: फ़िल्म की सफलता में अभिनेता के साथ कैमरामैन, निर्देशक, स्पॉट बॉय और मेकअप आर्टिस्ट का हाथ होता है। राजनीति, खेल या किसी बड़े आंदोलन में भी नायक के पीछे समर्थकों की बड़ी टोली होती है। इतिहास में राजाओं और सेनापतियों की जीत के पीछे गुमनाम सैनिकों का बलिदान होता है। ये सब अपने-अपने क्षेत्र के संगतकार हैं।
संगीत के शब्द और याद रखें
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| तारसप्तक | ऊँची ध्वनि वाले सात स्वरों का समूह |
| मध्य सप्तक | साधारण या बीच की ध्वनि |
| मंद्र सप्तक | मध्य सप्तक से नीचे के सात स्वरों का समूह |
| अंतरा | गीत का चरण |
| स्थायी | गीत की मुख्य पंक्ति, टेक |
| नौसिखिया | जिसने अभी सीखना शुरू किया हो |
| ढाँढस | तसल्ली |
याद रखें: संगतकार का अर्थ केवल साथ गाने वाला नहीं, निस्वार्थ सहयोगी है।
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 1)
प्रश्न 1. मुख्य गायक और संगतकार की आवाज़ में क्या अंतर बताया गया है? उत्तर: मुख्य गायक की आवाज़ चट्टान जैसी भारी और गंभीर है, जबकि संगतकार की आवाज़ सुंदर, कोमल और काँपती हुई है।
प्रश्न 2. स्थायी को सँभाले रखने का क्या अर्थ है? उत्तर: गीत की मुख्य धुन या टेक को लगातार गाते रहना, ताकि मुख्य गायक भटकने के बाद वापस लौट सके।
प्रश्न 3. आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरने का क्या आशय है? उत्तर: मुख्य गायक का स्वर बुझ रहा है, उसकी ऊर्जा खत्म हो रही है और वह ऊँचे स्वर को सँभाल नहीं पा रहा।
प्रश्न 4. संगतकार मुख्य गायक को ढाँढस कैसे बँधाता है? उत्तर: वह अपना स्वर मुख्य गायक के स्वर में मिला देता है और उसे एहसास कराता है कि वह अकेला नहीं है, गाया हुआ राग फिर से गाया जा सकता है।
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 2)
प्रश्न 5. संगतकार अपने स्वर को मुख्य गायक से ऊँचा क्यों नहीं उठाता? उत्तर: ताकि मुख्य गायक की प्रधानता बनी रहे और उसकी आवाज़ दब न जाए। यह संगतकार का त्याग और सम्मान है।
प्रश्न 6. कवि ने संगतकार की हिचक को कमज़ोरी के बजाय क्या कहा है और क्यों? उत्तर: मनुष्यता। दावा: हिचक उसकी विफलता नहीं, मानवीय गरिमा है। प्रमाण: कविता कहती है कि अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की कोशिश उसकी मनुष्यता है। व्याख्या: उसमें प्रतिभा की कमी नहीं, वह मुख्य गायक के सम्मान के लिए स्वयं को पीछे रखता है।
प्रश्न 7. मंगलेश डबराल की किन्हीं दो काव्य कृतियों के नाम लिखिए। उत्तर: पहाड़ पर लालटेन और घर का रास्ता।
प्रश्न 8. संगीत के अलावा किन क्षेत्रों में संगतकार जैसे लोग दिखाई देते हैं? उत्तर: खेल में कोच और सहायक खिलाड़ी, फ़िल्म में तकनीकी टीम, राजनीति में कार्यकर्ता, और निर्माण कार्य में मज़दूर और इंजीनियर।
आम गलतियाँ
- संगतकार की धीमी आवाज़ को उसकी कमज़ोरी लिखना। कवि इसे मनुष्यता कहते हैं।
- स्थायी और अंतरा को उलट देना। स्थायी मुख्य पंक्ति है, अंतरा गीत का चरण।
- कविता को केवल संगीत तक सीमित मानना। इसका संदेश जीवन के हर क्षेत्र पर लागू होता है।
कविता के संगीत वाले शब्द फिर से समझने हों, तो Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।