7 October 20266 min readBy Learnijoy Team
संस्कृति कक्षा 10: क्षितिज भाग 2 अध्याय 12 सार और प्रश्न-उत्तर
भदंत आनंद कौसल्यायन के निबंध का पूरा सार, सभ्यता और संस्कृति का अंतर, पाठ का संदेश और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर।
कक्षा 10 हिंदी क्षितिज भाग 2 का अध्याय 12 "संस्कृति" (Sanskriti) भदंत आनंद कौसल्यायन का विचारात्मक निबंध है। इस लेख में आप निबंध का शुरू से अंत तक सार, सभ्यता और संस्कृति का अंतर, लेखक के उदाहरण, निबंध का संदेश और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे। लेखक समझाते हैं कि मानव कल्याण की भावना ही सच्ची संस्कृति का आधार है।
निबंध की शुरुआत: शब्दों की उलझन
लेखक कहते हैं कि सभ्यता और संस्कृति ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग सबसे अधिक होता है, पर जिन्हें समझना सबसे कठिन है। जब इनके साथ भौतिक या आध्यात्मिक जैसे विशेषण जुड़ जाते हैं, तो अर्थ और भी उलझ जाता है। इसलिए लेखक इन्हें इनके मूल अर्थ में समझना चाहते हैं। वे पूछते हैं कि क्या ये दोनों एक ही चीज़ हैं या अलग-अलग, और अगर अलग हैं तो इनमें अंतर क्या है। इस गुत्थी को सुलझाने के लिए वे मानव इतिहास के कुछ आविष्कारों के उदाहरण देते हैं।
आग और सुई-धागा: संस्कृति और सभ्यता का अंतर
उस समय की कल्पना कीजिए जब मनुष्य के पास आग नहीं थी। जिसने पहली बार आग की खोज की, वह महान आविष्कारकर्ता था। इसी तरह सुई-धागे का आविष्कार करने वाले ने सोचा कि लोहे के टुकड़े को घिसकर और उसमें छेद करके दो कपड़ों को जोड़ा जा सकता है।
लेखक के अनुसार वह योग्यता, प्रवृत्ति या प्रेरणा, जिसके बल पर कोई नया आविष्कार होता है, उस व्यक्ति की संस्कृति है। संस्कृति आंतरिक होती है; यह वह बुद्धि या विवेक है जो किसी नए तथ्य का दर्शन कराता है। और उस आविष्कार से जो वस्तु मिलती है, वह सभ्यता है।
| संस्कृति | सभ्यता |
|---|---|
| आंतरिक शक्ति, योग्यता, बुद्धि या प्रेरणा | उस शक्ति का बाहरी परिणाम |
| आविष्कार कराने वाली मौलिक सोच | आविष्कार से बनी वस्तुएँ और जीने के तरीके |
| उदाहरण: आग खोजने की योग्यता | उदाहरण: आविष्कार से मिली वस्तुएँ; हमारे खाने-पीने, पहनने और आवागमन के तरीके |
संस्कृत व्यक्ति और सभ्य व्यक्ति
जो व्यक्ति अपनी बुद्धि और विवेक से किसी नई चीज़ की खोज करता है, वह संस्कृत व्यक्ति है। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज की, इसलिए वह संस्कृत मानव था।
न्यूटन के बाद की पीढ़ियों को यह ज्ञान अनायास, यानी बिना प्रयास के, मिल गया। आज विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन से अधिक बातें जान सकता है। इसलिए वह न्यूटन से अधिक सभ्य तो कहला सकता है, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं। कारण यह है कि संस्कृत व्यक्ति मौलिक खोज करता है, जबकि सभ्य व्यक्ति पूर्वजों से मिले ज्ञान और सुख-सुविधाओं का उपयोग करता है।
संस्कृति की प्रेरणाएँ और महामानव
लेखक कहते हैं कि आग की खोज के पीछे पेट की ज्वाला (भूख) और सुई-धागे के पीछे शीतोष्ण (ठंड-गर्मी) से बचने की इच्छा कारण रही होगी। पर संस्कृति इतने तक सीमित नहीं है।
- जिज्ञासा: जिसका पेट भरा है और तन ढका है, वह भी रात के तारों को देखकर बेचैन हो सकता है, क्योंकि वह ब्रह्मांड के रहस्य जानना चाहता है। यह जिज्ञासा भी संस्कृति की जननी है।
- परोपकार और त्याग: दूसरे के मुँह में निवाला डालने के लिए अपना निवाला छोड़ देना, या बीमार बच्चे के लिए रात भर जागना भी संस्कृति का हिस्सा है।
लेखक परोपकार समझाने के लिए लेनिन का अपना भोजन दूसरों को देना और कार्ल मार्क्स का मजदूरों के सुख के लिए कठिन जीवन बिताना जैसे उदाहरण देते हैं। सिद्धार्थ के गृह-त्याग को वे मानवता को तृष्णा और संघर्ष से मुक्ति दिलाने की प्रेरणा से जोड़ते हैं। ये उदाहरण बताते हैं कि संस्कृति का उच्चतम रूप हमें स्वार्थ से ऊपर उठकर पूरी मानवता के हित में सोचने और काम करने की प्रेरणा देता है।
असंस्कृति, असभ्यता और अविभाज्य संस्कृति
जब मनुष्य की योग्यता उसे आत्म-विनाश के साधन, जैसे हथियार, बनाने की ओर ले जाती है, तो लेखक उसे असंस्कृति कहते हैं। ऐसी असंस्कृति का परिणाम असभ्यता है। अगर संस्कृति का नाता कल्याण की भावना से टूट जाए, तो वह विनाश का कारण बनती है। लेखक के अनुसार जो चीज़ मनुष्य के लिए कल्याणकारी नहीं, वह न सभ्यता है, न संस्कृति।
लेखक मानते हैं कि मानव संस्कृति अविभाज्य है। उसे धर्म, जाति या राष्ट्र के नाम पर बाँटना गलत है। संस्कृति में जो अंश कल्याण का है, वही श्रेष्ठ और स्थायी है। सभ्यता की बाहरी चीज़ें बदल सकती हैं, पर मैत्री-भाव और प्रज्ञा (बुद्धि) से मिले सत्य सदा महत्वपूर्ण रहते हैं। संस्कृति के नाम पर सड़े-गले रिवाजों (कूड़े-करकट) को पकड़कर नहीं बैठना चाहिए।
संदेश: सच्ची संस्कृति वही है जो मानव कल्याण से जुड़ी हो। बदलते संसार में मानवता का हित सबसे ऊपर रहना चाहिए।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. लेखक के अनुसार सभ्यता और संस्कृति शब्दों के साथ क्या समस्या है? उत्तर: इन शब्दों का प्रयोग बहुत होता है, पर इनकी समझ बहुत कम है। जब इनके साथ भौतिक या आध्यात्मिक जैसे विशेषण जुड़ जाते हैं, तो इनका अर्थ और अस्पष्ट हो जाता है।
प्रश्न 2. लेखक ने संस्कृति किसे कहा है? उत्तर: वह योग्यता, प्रवृत्ति या प्रेरणा, जिसके बल पर किसी नए तथ्य या वस्तु का आविष्कार होता है, उस व्यक्ति की संस्कृति कहलाती है।
प्रश्न 3. संस्कृति और सभ्यता में क्या अंतर है? उत्तर: संस्कृति आंतरिक शक्ति है और सभ्यता उसका बाहरी परिणाम। आग या सुई-धागे की खोज कराने वाली योग्यता संस्कृति है, जबकि उस आविष्कार से मिली वस्तु और उससे बने जीने के तरीके सभ्यता हैं।
प्रश्न 4. न्यूटन को संस्कृत मानव क्यों कहा गया है? उत्तर: न्यूटन ने अपनी बुद्धि और विवेक से गुरुत्वाकर्षण के नए सिद्धांत की खोज की। मौलिक खोज करने की इसी क्षमता के कारण वे संस्कृत मानव कहलाए।
प्रश्न 5. आज का विद्यार्थी न्यूटन से अधिक जानकर भी उससे अधिक संस्कृत क्यों नहीं है? उत्तर: क्योंकि उसे यह ज्ञान बिना प्रयास के पूर्वजों से मिला है; उसने स्वयं मौलिक खोज नहीं की। वह न्यूटन से अधिक सभ्य कहला सकता है, पर अधिक संस्कृत नहीं।
प्रश्न 6. क्या केवल भौतिक आवश्यकताएँ ही संस्कृति की जननी हैं? उत्तर: नहीं। भौतिक आवश्यकताओं के अलावा ज्ञान की जिज्ञासा और दूसरों के कल्याण के लिए त्याग की भावना भी संस्कृति की जननी है।
प्रश्न 7. लेखक ने असंस्कृति किसे कहा है? उत्तर: जब मनुष्य की योग्यता और बुद्धि का उपयोग मानव कल्याण के बजाय आत्म-विनाश के साधन बनाने में होता है, तो लेखक उसे असंस्कृति कहते हैं। उसका परिणाम असभ्यता है।
प्रश्न 8. मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है— इसका क्या अर्थ है? उत्तर: संस्कृति को धर्म, जाति या राष्ट्र के नाम पर टुकड़ों में नहीं बाँटा जा सकता। पूरी मानवता की उन्नति और कल्याण के लिए किए गए प्रयास एक ही संस्कृति का हिस्सा हैं, चाहे वे किसी भी देश या धर्म के व्यक्ति ने किए हों।
उत्तर लिखते समय संस्कृति को आंतरिक योग्यता और सभ्यता को उसके बाहरी परिणाम के रूप में स्पष्ट करें और न्यूटन या आग जैसा उदाहरण ज़रूर दें। पूरा निबंध NCERT की पाठ्यपुस्तक में पढ़ा जा सकता है। इस निबंध को आसानी से समझने के लिए Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।