7 October 20266 min readBy Learnijoy Team
तताँरा-वामीरो कथा कक्षा 10: स्पर्श अध्याय 10 सार और प्रश्न-उत्तर
लीलाधर मंडलोई की लोककथा का पूरा सार, तताँरा और वामीरो का चरित्र, कथा का संदेश और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर।
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श भाग 2 का अध्याय 10 "तताँरा-वामीरो कथा" (Tatara Vamiro Katha) लीलाधर मंडलोई की लिखी अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की एक लोककथा है। इस लेख में आप कथा का शुरू से अंत तक सार, तताँरा और वामीरो का चरित्र, कथा का संदेश और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे। यह एक मार्मिक प्रेम कहानी है, जो समाज की संकुचित रूढ़ियों को तोड़ने के लिए दिए गए बलिदान को दिखाती है।
लेखक परिचय: लीलाधर मंडलोई
लीलाधर मंडलोई का जन्म 1954 में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के छोटे-से गाँव गुढ़ी में हुआ। उनकी शिक्षा भोपाल और रायपुर में हुई। वे मूलतः कवि हैं और उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ अंचल के जनजीवन का सजीव चित्रण मिलता है। अंडमान-निकोबार की जनजातियों पर लिखा उनका गद्य समाजशास्त्रीय अध्ययन जैसा महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं— 'घर-घर घूमा', 'रात-बिरात', 'मगर एक आवाज़' और 'देखा-अनदेखा'।
कथा का सार: पहली मुलाकात से प्रेम तक
तताँरा: तताँरा पासा गाँव का शक्तिशाली और नेक दिल युवक था। वह हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था और पूरे द्वीप की सेवा को अपना कर्तव्य समझता था, इसलिए सब उसे सम्मान देते थे। उसकी कमर में लकड़ी की एक तलवार बँधी रहती थी। लोग मानते थे कि उसमें अद्भुत दैवीय शक्ति है। तताँरा ने कभी उसका सार्वजनिक उपयोग नहीं किया था, इसलिए वह एक रहस्य बनी हुई थी।
पहली मुलाकात: दिन भर के परिश्रम के बाद एक शाम तताँरा समुद्र किनारे टहल रहा था। तभी उसे एक मधुर गीत सुनाई दिया। उसने देखा कि एक युवती, वामीरो, मग्न होकर गा रही है। तताँरा अपनी सुध-बुध खो बैठा। गीत रुकने पर उसने उसे पूरा करने का आग्रह किया। वामीरो पहले झिझकी और बेरुखी से जवाब दिया, क्योंकि वह लपाती गाँव की थी और दूसरे गाँव के युवक से बात करना सामाजिक नियमों के विरुद्ध था।
मूक प्रेम: इसके बाद दोनों रोज़ उसी जगह मिलने लगे। वे घंटों बिना कुछ बोले एक-दूसरे को देखते रहते। उनके मौन में समर्पण और प्रेम था। जल्दी ही यह खबर पूरे द्वीप में फैल गई। द्वीप की परंपरा थी कि विवाह के लिए दोनों का एक ही गाँव का होना ज़रूरी है। गाँव के बड़ों ने उन्हें समझाया, पर वे अपने प्रेम पर अडिग रहे।
पशु-पर्व, अपमान और द्वीप का बँटवारा
पासा गाँव में पशु-पर्व हुआ, जिसमें शक्ति-प्रदर्शन और नृत्य-संगीत होता था। तताँरा वहाँ वामीरो को ढूँढ रहा था। दोनों मिले तो वामीरो रोने लगी। उसे रोता देख उसकी माँ क्रोधित हो उठी और उसने पूरे गाँव के सामने तताँरा को अपमानित किया।
यह अपमान तताँरा के लिए असहनीय था। उसे अपनी असहायता और समाज की जड़ परंपराओं पर बहुत गुस्सा आया। उसने अपनी तलवार निकाली, पूरी शक्ति से ज़मीन में घोंप दी और उसे खींचने लगा। धरती में गहरी दरार पड़ गई और द्वीप दो टुकड़ों में बँटने लगा। एक ओर तताँरा था, दूसरी ओर वामीरो। तताँरा वाला हिस्सा समुद्र में धँसने लगा। वह लहूलुहान होकर अचेत हो गया और बहकर कहाँ गया, किसी को पता नहीं चला। वामीरो उसके वियोग में पागल हो गई और बाद में उसका भी कोई सुराग नहीं मिला।
ध्यान दें: द्वीप के फटने का यह प्रसंग लोककथा का अद्भुत तत्व है, द्वीप बनने का वैज्ञानिक विवरण नहीं।
लोक-विश्वास और समाज में बदलाव
निकोबारी लोग मानते हैं कि तताँरा की तलवार से बने दो टुकड़ों में से एक कार-निकोबार है और दूसरा लिटिल अंडमान, जो आज एक-दूसरे से 96 किमी दूर हैं।
पाठ में दोनों के खो जाने के बाद विवाह की रूढ़ि बदलने का उल्लेख है। पाठ में दोनों की मृत्यु का सीधा वर्णन नहीं है।
| स्थिति | पहले | बाद में |
|---|---|---|
| विवाह का नियम | केवल अपने ही गाँव में विवाह | दूसरे गाँवों में भी विवाह होने लगे |
| सामाजिक दृष्टि | कठोर और रूढ़िवादी | प्रेम और मानवीय भावनाओं को महत्व |
पात्रों का चरित्र और कथा का संदेश
- तताँरा: शक्तिशाली, नेक दिल, परोपकारी और सबका प्रिय; सच्चा प्रेमी, पर अपमान पर उसका क्रोध भड़क उठता है।
- वामीरो: मधुर गायिका, संकोची; सामाजिक नियमों से डरती है, फिर भी प्रेम पर अडिग रहती है।
- वामीरो की माँ: परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता करने वाली; उन्होंने तताँरा को सबके सामने अपमानित किया।
प्रतीकात्मक अर्थ: तलवार से धरती का फटना असल में उन पुरानी परंपराओं पर प्रहार है, जो प्रेम के रास्ते में बाधा बनती थीं।
संदेश: परंपराएँ मनुष्य की सुविधा और सामाजिक सद्भाव के लिए बनती हैं। जब वही परंपराएँ मनुष्य की खुशी छीनने लगें, तो वे बोझ बन जाती हैं और उनका टूटना ही अच्छा है। कथा मानवीय भावनाओं को दबाने वाली परंपरा पर प्रश्न उठाती है।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. तताँरा की तलवार के बारे में लोगों का क्या मत था? उत्तर: लोग मानते थे कि लकड़ी की होने पर भी उस तलवार में अद्भुत दैवीय शक्ति है और तताँरा की शक्ति का रहस्य उसी में छिपा है।
प्रश्न 2. वामीरो ने तताँरा को बेरुखी से जवाब क्यों दिया? उत्तर: वामीरो लपाती गाँव की थी और तताँरा पासा गाँव का। उस समय के नियमों के अनुसार अपने गाँव के बाहर के युवक से बात करना या संबंध रखना वर्जित था।
प्रश्न 3. तताँरा और वामीरो के विवाह में सबसे बड़ी बाधा क्या थी? उत्तर: सबसे बड़ी बाधा यह रूढ़िवादी परंपरा थी कि विवाह केवल एक ही गाँव के युवक-युवती के बीच हो सकता है।
प्रश्न 4. वामीरो की माँ ने तताँरा को क्यों अपमानित किया? उत्तर: उन्होंने अपनी बेटी को दूसरे गाँव के युवक तताँरा के साथ रोते देखा। उन्हें यह अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और परंपरा के विरुद्ध लगा, इसलिए उन्होंने तताँरा को पूरे गाँव के सामने अपमानित किया।
प्रश्न 5. तताँरा ने अपनी तलवार ज़मीन में क्यों घोंप दी? उत्तर: वह समाज की कठोर परंपराओं और वामीरो की माँ के किए अपमान से बहुत क्रोधित और दुखी था। अपने इसी आवेग को व्यक्त करने के लिए उसने तलवार ज़मीन में घोंप दी।
प्रश्न 6. निकोबारी लोग द्वीप के दो टुकड़ों के बारे में क्या मानते हैं? उत्तर: वे मानते हैं कि तताँरा की तलवार से बने दो टुकड़ों में एक कार-निकोबार है और दूसरा लिटिल अंडमान, जो आज एक-दूसरे से 96 किमी दूर हैं।
प्रश्न 7. तताँरा-वामीरो की त्रासदी का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा? उत्तर: कथा के अनुसार इसके बाद दूसरे गाँवों में भी विवाह स्वीकार किए जाने लगे। यह रूढ़ियों पर मानवीय संवेदना की जीत का संकेत है।
प्रश्न 8. रूढ़ियाँ जब बंधन बनकर बोझ बनने लगें, तब उनका टूट जाना ही अच्छा है। पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। उत्तर: एक ही गाँव में विवाह की रूढ़ि ने तताँरा और वामीरो को अलग कर दिया और अंत में उनके बलिदान का कारण बनी। परंपराएँ मनुष्य की सुविधा के लिए होती हैं; जब वे खुशी छीनने लगें तो बोझ बन जाती हैं। तताँरा के बलिदान ने इसी बोझ को खत्म किया और समाज में नई, उदार परंपरा शुरू हुई।
बड़े प्रश्न में पहले दावा लिखें, फिर कथा से साक्ष्य दें और अंत में व्याख्या करें। पूरी कथा NCERT की पाठ्यपुस्तक में पढ़ी जा सकती है। इस कथा को आसानी से दोहराने के लिए Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।