7 October 20266 min readBy Learnijoy Team

तोप कविता कक्षा 10: भावार्थ और प्रश्न-उत्तर (स्पर्श अध्याय 5)

वीरेन डंगवाल की कविता तोप का सरल भावार्थ, विरासत और शक्ति की नश्वरता का संदेश, कठिन शब्द और प्रश्न-उत्तर।

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श भाग 2 का अध्याय 5 तोप (Top) कविता है, जिसे वीरेन डंगवाल ने लिखा है। कंपनी बाग के मुहाने पर रखी 1857 की एक तोप के माध्यम से कवि बताते हैं कि दमन की कोई भी शक्ति हमेशा नहीं रहती। इस लेख में आप कविता का क्रम से भावार्थ, प्रतीक, कठिन शब्द और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे।

कवि परिचय: वीरेन डंगवाल

  • वीरेन डंगवाल (1947-2015) समकालीन हिंदी कविता के महत्त्वपूर्ण कवि हैं।
  • उनका जन्म उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले के कीर्तिनगर में हुआ था।
  • उच्च शिक्षा इलाहाबाद से प्राप्त की। वे प्राध्यापक रहे और पत्रकारिता से भी जुड़े रहे।
  • उनकी कविताएँ समाज के साधारण लोगों, हाशिए के जीवन और उन छोटी चीज़ों पर ध्यान देती हैं जिन्हें हम अनदेखा कर देते हैं।
  • प्रमुख कृतियाँ: इसी दुनिया में और दुष्चक्र में स्रष्टा। दुष्चक्र में स्रष्टा के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • उनकी भाषा सरल पर मर्मस्पर्शी है।

कविता का संदर्भ: विरासत क्या सिखाती है

कंपनी बाग और 1857 की तोप औपनिवेशिक इतिहास के चिह्न हैं। बाग में रखी तोप उस दमनकारी शक्ति की याद दिलाती है जिसने आज़ादी के लिए लड़ने वालों पर प्रहार किया था। आज यही तोप विरासत (धरोहर) के रूप में हमारे सामने है।

विरासत हमें दो बातें सिखाती है:

  1. हमारी प्राचीन उपलब्धियाँ।
  2. पूर्वजों से हुई वे चूकें जिनके कारण हमें गुलामी झेलनी पड़ी।

भावार्थ: तोप का भयानक अतीत

आज यह तोप कंपनी बाग के मुहाने (प्रवेश द्वार) पर धरी (रखी) गई है। यह हमें विरासत में मिली है, इसलिए इसकी खूब देखभाल होती है। कविता में बताया गया है कि साल में दो बार इसे चमकाया जाता है; ये दो अवसर कौन-से हैं, कविता यह नहीं बताती।

जब सैलानी (पर्यटक) बाग में आते हैं, तो तोप उन्हें अपने ज़माने की याद दिलाती है। वह बताती है कि 1857 में वह बहुत जबर (शक्तिशाली) थी और उसने बड़े-बड़े सूरमाओं (वीरों) के धज्जे उड़ा दिए थे। धज्जे उड़ाना मुहावरा है, जिसका अर्थ है पूरी तरह नष्ट कर देना।

समयतोप की स्थिति
1857अत्यंत शक्तिशाली, वीरों का दमन करने वाली, ख़ौफ़ का प्रतीक
आजकंपनी बाग के मुहाने पर रखी प्रदर्शन की वस्तु, केवल ऐतिहासिक धरोहर

भावार्थ: आज की तोप और चिड़ियाँ

अब तोप की हालत बदल चुकी है। जो तोप कभी आग उगलती थी, अब फारिग (खाली) है। छोटे बच्चे उस पर बैठकर घुड़सवारी करते हैं। जब बच्चे नहीं होते, तो चिड़ियाँ उस पर बैठकर गपशप करती हैं। गौरैया जैसी छोटी चिड़ियाँ तो कभी-कभी शरारत में तोप के मुँह के भीतर भी घुस जाती हैं।

यहाँ गहरा व्यंग्य है: जो तोप कभी इंसानों को खत्म करती थी, आज एक छोटी चिड़िया भी उससे नहीं डरती। यह दृश्य शक्ति के अहंकार के अंत को दिखाता है।

कविता का संदेश

चिड़ियों की गतिविधियाँ मानो कहती हैं: 'कितनी भी बड़ी हो तोप, एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद'। अत्याचारी सत्ता चाहे कितनी भी ताकतवर हो, उसका अंत ज़रूर होता है।

यह कविता केवल एक निर्जीव वस्तु का वर्णन नहीं, बल्कि दमन के बल पर राज करने वाली सभी ताकतों के लिए चेतावनी है। अंत में जीत मानवीय मूल्यों, शांति और स्वतंत्रता की होती है।

भाषा, शिल्प और कठिन शब्द

  • भाषा सहज हिंदी है, जिसमें उर्दू (जबर, सूरमा, धज्जे, फारिग) और देशज (धर, मुहाने) शब्दों का मेल है।
  • धज्जे उड़ाना जैसे मुहावरों से भाषा में सजीवता आई है।
  • मानवीकरण: तोप स्वयं अपनी कहानी सुनाती लगती है।
  • बिंब: चिड़ियों का चहकना और बच्चों का खेलना शांति के बिंब हैं, जो तोप की विनाशकारी छवि के विपरीत हैं।
शब्दअर्थ
मुहानेप्रवेश द्वार
धररखी गई, स्थापित की गई
धरोहर / विरासतपूर्वजों से मिली वस्तु
सैलानीपर्यटक, यात्री
जबरशक्तिशाली
सूरमावीर योद्धा
फारिगमुक्त, खाली

महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 1)

प्रश्न 1. विरासत में मिली चीज़ें हमें क्या सिखाती हैं? उत्तर: वे हमें देश की प्राचीन उपलब्धियों का ज्ञान कराती हैं और उन गलतियों के प्रति सचेत करती हैं जिनके कारण आने वाली पीढ़ियों को कष्ट सहना पड़ा।

प्रश्न 2. तोप को साल में दो बार क्यों चमकाया जाता है? उत्तर: तोप विरासत के रूप में रखी गई है, इसलिए उसकी देखभाल होती है और साल में दो बार उसे चमकाया जाता है। इससे धरोहर का संरक्षण दिखता है। कविता इन दो अवसरों के नाम नहीं बताती।

प्रश्न 3. तोप सैलानियों को क्या बताती है? उत्तर: वह अपने ज़माने की याद दिलाती है कि 1857 में वह बहुत जबर थी और उसने बड़े-बड़े सूरमाओं के धज्जे उड़ा दिए थे।

प्रश्न 4. चिड़ियों का तोप के भीतर घुसना किस बात का संकेत है? उत्तर: इससे पता चलता है कि अब तोप का डर पूरी तरह खत्म हो गया है और शांति व स्वतंत्रता का वातावरण है। यह शक्ति की अस्थिरता भी दिखाता है।

महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 2)

प्रश्न 5. कविता की अंतिम पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए। उत्तर: दमन और आतंक की शक्ति स्थायी नहीं होती। समय आने पर बड़े से बड़े अत्याचारी को भी शांत होना पड़ता है, जैसे तोप का मुँह एक दिन बंद हो ही जाता है।

प्रश्न 6. कविता में धर शब्द का प्रयोग किस अर्थ में हुआ है? उत्तर: रखी गई या स्थापित की गई के अर्थ में। यह तोप की आज की स्थिरता दिखाता है।

प्रश्न 7. तोप कविता की भाषा की दो विशेषताएँ लिखिए। उत्तर: (1) सहज हिंदी में उर्दू और देशज शब्दों का मेल है। (2) धज्जे उड़ाना जैसे मुहावरों और मानवीकरण से भाषा सजीव बनी है।

प्रश्न 8. कंपनी बाग में रखी तोप हमें क्या सीख देती है? उत्तर: दावा: तोप शक्ति की नश्वरता की सीख देती है। साक्ष्य: आज उस पर चिड़ियाँ गपशप करती हैं और बच्चे घुड़सवारी करते हैं। व्याख्या: 1857 में आतंक का पर्याय रही तोप आज केवल बैठने की जगह रह गई है। इसलिए अपनी शक्ति पर अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय हर अत्याचारी का मुँह बंद कर देता है।

आम गलतियाँ

  • तोप को केवल एक पुरानी वस्तु मानकर संदेश न लिखना। वह दमनकारी शक्ति का प्रतीक है।
  • साल में दो बार चमकाने के अवसरों के नाम अपनी ओर से जोड़ देना। कविता इन्हें नहीं बताती।
  • उत्तर में कविता का संदर्भ न देना। चिड़ियाँ, बच्चे और कंपनी बाग का ज़िक्र उत्तर को प्रामाणिक बनाता है।

कविता का संदेश अपने शब्दों में दोहराना हो, तो Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।