7 October 20266 min readBy Learnijoy Team
उत्साह और अट नहीं रही है कक्षा 10: भावार्थ, प्रश्न-उत्तर
निराला की दोनों कविताओं का सरल भावार्थ, बादल और फागुन के प्रतीक, अलंकार और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर।
कक्षा 10 हिंदी क्षितिज भाग 2 के अध्याय 4 में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की दो कविताएँ हैं: उत्साह और अट नहीं रही है (Utsah aur At Nahi Rahi Hai)। पहली कविता बादलों के माध्यम से बदलाव का आह्वान करती है, दूसरी फागुन की सुंदरता का चित्र खींचती है। इस लेख में आप दोनों कविताओं का भावार्थ, अलंकार और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे।
कवि परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
- निराला छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं।
- उनका जन्म 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ, पर वे मूलतः उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के निवासी थे।
- उनका जीवन संघर्षों और दुखों से भरा रहा, जिसने उनके लेखन में गहराई और विद्रोह की भावना भरी।
- उनकी कविता में प्रकृति, करुणा और परिवर्तन की आकांक्षा मिलती है।
- हिंदी में मुक्त छंद को प्रतिष्ठित करने में उनका बड़ा योगदान है। मुक्त छंद में तय मात्रा और तुक के बंधन कम होते हैं, पर कविता की अपनी लय बनी रहती है।
उत्साह: बादलों का आह्वान गीत
उत्साह बादलों को संबोधित एक आह्वान गीत है। यहाँ बादल केवल वर्षा का साधन नहीं, परिवर्तन का प्रतीक भी है। कविता में बादल के दो रूप हैं:
| बादल का रूप | अर्थ |
|---|---|
| वर्षा करने वाला बादल | तपती धरती और व्याकुल लोगों को राहत |
| गर्जना और बिजली वाला बादल | उत्साह, नई कल्पना और परिवर्तन की ऊर्जा |
इसीलिए कवि बादलों से रिमझिम बरसने के बजाय गरजने को कहते हैं। गर्जना जोश का प्रतीक है, जो समाज और साहित्य में बदलाव के लिए ज़रूरी है।
उत्साह: भावार्थ
पहला भाग: कवि बादलों से कहते हैं कि वे पूरे आकाश को घेर लें ('घेर घेर घोर गगन')। काले, घुँघराले बादल उन्हें किसी बच्चे की कोमल कल्पना जैसे लगते हैं। बादलों के हृदय में बिजली की चमक (विद्युत-छवि) छिपी है, जो नई ऊर्जा देती है। कवि के लिए यह नई कविता रचने की प्रेरणा और शक्ति का प्रतीक है।
दूसरा भाग: सारा संसार गर्मी (निदाघ) से व्याकुल और अनमना था। ऐसे में किसी अज्ञात दिशा से आए बादल तपती धरती को अपने जल से शीतल कर देते हैं। तप्त धरा का अर्थ दुखों से परेशान मानवता भी हो सकता है। कवि बादल को नवजीवन वाले कहकर भी पुकारते हैं।
अट नहीं रही है: फागुन का सौंदर्य
यह कविता फागुन मास (बसंत ऋतु) की सुंदरता का वर्णन करती है। फागुन में प्रकृति इतनी सुंदर हो जाती है कि उसकी आभा (चमक) कहीं समा नहीं पा रही, यानी अट नहीं रही। चारों ओर हरियाली और फूलों की भरमार है। फागुन की सुगंध हर घर में भर गई है। यह रूप इतना मोहक है कि कवि चाहकर भी उससे आँखें नहीं हटा पाते।
मानवीकरण: 'कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो' में कवि फागुन से ऐसे बात करते हैं जैसे वह कोई जीवित व्यक्ति हो। लगता है बसंत स्वयं साँस ले रहा है और उसकी खुशबू हर जगह फैल रही है।
पेड़ों की डालियाँ कहीं हरी पत्तियों से, कहीं लाल कोंपलों से लदी हैं। मानो प्रकृति के गले में फूलों की मालाएँ सजी हों। 'उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो' का अर्थ है कि फागुन मन में ऐसी उमंग भरता है कि मन पंख लगाकर आकाश में उड़ना चाहता है।
काव्य-शिल्प और कठिन शब्द
- भाषा तत्सम प्रधान खड़ी बोली है; नाद-सौंदर्य और प्रतीकों का सुंदर प्रयोग है।
- अनुप्रास: 'घेर घेर घोर गगन' में घ वर्ण की आवृत्ति। इससे नाद-सौंदर्य पैदा होता है।
- पुनरुक्ति प्रकाश: ललित-ललित, घर-घर, पाट-पाट। इससे लय और प्रभाव बढ़ता है।
- मानवीकरण: फागुन का साँस लेना।
- निराला ने छंदों के बंधन तोड़कर मुक्त छंद में अपनी बात कही है।
नाद-सौंदर्य का अर्थ है: शब्दों के चयन से ऐसी ध्वनि या गूँज पैदा होना जो दृश्य को जीवंत कर दे।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अट | समाना |
| आभा | चमक, कांति |
| पाट-पाट | जगह-जगह |
| निदाघ | गर्मी |
| विद्युत-छवि | बिजली की चमक |
| तप्त धरा | तपती धरती |
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 1)
प्रश्न 1. कवि बादलों से रिमझिम बरसने के बजाय गरजने को क्यों कहता है? उत्तर: कवि बादल को परिवर्तन का दूत मानते हैं। गर्जना उत्साह और जोश का प्रतीक है, जो समाज में बदलाव लाने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 2. 'विद्युत-छवि उर में' का क्या आशय है? उत्तर: बादलों के हृदय में बिजली की चमक छिपी है। कवि के लिए यह नई कविता रचने की प्रेरणा और शक्ति का प्रतीक है।
प्रश्न 3. उत्साह कविता में बादल किन अर्थों की ओर संकेत करता है? उत्तर: दो अर्थों की ओर। पहला, वह प्यासे और पीड़ित लोगों की आकांक्षा पूरी करने वाला परोपकारी रूप है। दूसरा, वह नई कल्पना और बदलाव लाने वाली शक्ति का प्रतीक है। कवि उसे विद्युत-छवि और नवजीवन वाले कहकर पुकारते हैं।
प्रश्न 4. तप्त धरा से कवि का संकेत किस ओर है? उत्तर: गर्मी से तपती धरती की ओर, और साथ ही दुखों से परेशान मानवता की ओर भी। बादल दोनों को राहत देते हैं।
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 2)
प्रश्न 5. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से अलग है? उत्तर: फागुन में पेड़ों पर नए लाल-हरे पत्ते आते हैं, फूलों की सुगंध हवा में भर जाती है और प्रकृति की सुंदरता इतनी होती है कि कहीं समाती नहीं।
प्रश्न 6. 'उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो' का अर्थ लिखिए। उत्तर: फागुन की सुंदरता मन में इतनी उमंग भर देती है कि मन मानो पंख लगाकर आकाश में उड़ने को व्याकुल हो जाता है।
प्रश्न 7. अट नहीं रही है कविता में मानवीकरण कहाँ है? उत्तर: 'कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो' में। यहाँ फागुन को साँस लेते हुए जीवित व्यक्ति की तरह दिखाया गया है।
प्रश्न 8. नाद-सौंदर्य से क्या तात्पर्य है? उदाहरण दीजिए। उत्तर: शब्दों के चयन से पैदा हुई विशेष ध्वनि या गूँज, जो दृश्य को जीवंत कर दे। उदाहरण: 'घेर घेर घोर गगन', जहाँ घ वर्ण की आवृत्ति से शब्दों में गूँज पैदा होती है।
आम गलतियाँ
- उत्साह के बादल को केवल वर्षा से जोड़ना। उसका परिवर्तन वाला अर्थ भी लिखें।
- अट का अर्थ न लिखना। अट = समाना; सुंदरता समा नहीं रही।
- पुनरुक्ति प्रकाश और अनुप्रास को मिला देना। इस पाठ में घ वर्ण की आवृत्ति अनुप्रास है, जबकि ललित-ललित, घर-घर जैसे पूरे शब्दों का दोहराव पुनरुक्ति प्रकाश है।
दोनों कविताओं का भावार्थ एक बार फिर अपने शब्दों में दोहराना हो, तो Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।