01 · समझें
प्रकृति और मनुष्य का बदलता संबंध
लेखक पाठ की शुरुआत में यह स्पष्ट करते हैं कि यह धरती केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि उन सभी जीवधारियों की है जिन्हें ईश्वर ने जन्म दिया है।
कुदरत (प्रकृति) ने इस धरती को सभी जीवों के लिए साझा संपत्ति के रूप में बनाया था। प्रारंभ में मनुष्य, पशु-पक्षी, नदियाँ और पर्वत सभी एक परिवार की तरह मिल-जुलकर रहते थे। लेकिन मनुष्य ने अपनी बुद्धि का उपयोग करके धीरे-धीरे पूरी धरती पर अपना एकाधिकार जमा लिया और अन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवासों से बेदखल कर दिया।
आज स्थिति यह है कि मनुष्य न केवल अन्य प्रजातियों के प्रति संवेदनहीन हो गया है, बल्कि वह अपनी ही जाति के सुख-दुख की भी चिंता नहीं करता। लेखक पाठकों को अपने आसपास के लोगों के व्यवहार को देखने और इस पाठ के माध्यम से अपनी संवेदनाओं को पुनः जागृत करने का आह्वान करते हैं।
रुकें और सोचें
पहले खुद सोचें। अपना उत्तर लिखने और जाँचने के लिए मुफ़्त अकाउंट चाहिए।
प्रश्न
लेखक के अनुसार धरती पर किसका अधिकार है?
उत्तर देखने के लिए लॉग इन करें
अपना उत्तर लिखें और हमारे उत्तर से मिलाएँ — मुफ़्त।
लॉग इन करेंनए हैं? मुफ़्त अकाउंट बनाएँNCERT reference: chapter PDF page 2.
02 · समझें
महात्मा सुलेमान और चींटियों का प्रसंग
बाइबिल और कुरान में वर्णित सुलेमान (सोलोमेन) की कथा के माध्यम से लेखक ने एक आदर्श शासक की करुणा को दर्शाया है।
पाठ में सुलेमान से जुड़ी एक धार्मिक कथा आती है। उन्हें पशु-पक्षियों की भाषा समझने वाला राजा बताया गया है। सेना के घोड़ों की आवाज सुनकर चींटियाँ डरती हैं। यह कथा छोटे जीवों के प्रति करुणा समझाने के लिए दी गई है।
सुलेमान ने चींटियों की घबराहट को समझा और रुककर उनसे कहा कि वे डरें नहीं, क्योंकि खुदा ने उन्हें सबका रखवाला बनाया है। उन्होंने स्वयं को सबके लिए 'मुहब्बत' बताया। चींटियों ने उनके लिए दुआ की और वे आगे बढ़ गए। यह प्रसंग सिखाता है कि एक शक्तिशाली व्यक्ति को छोटे से छोटे जीव के प्रति भी दयालु होना चाहिए।
सुलेमान और चींटियों का संवाद
- 1
लश्कर का आगमन
सुलेमान अपनी सेना के साथ रास्ते से गुजर रहे थे।
- 2
चींटियों का भय
घोड़ों की टापों की आवाज़ सुनकर चींटियाँ बिलों की ओर भागीं।
- 3
सुलेमान का आश्वासन
सुलेमान ने कहा कि वे किसी के लिए मुसीबत नहीं, बल्कि रक्षक हैं।
- 4
दुआ और प्रस्थान
चींटियों ने दुआ दी और सुलेमान अपनी मंजिल की ओर बढ़ गए।
यह क्रम सुलेमान की संवेदनशीलता और जीवों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।
रुकें और सोचें
पहले खुद सोचें। अपना उत्तर लिखने और जाँचने के लिए मुफ़्त अकाउंट चाहिए।
प्रश्न
सुलेमान ने चींटियों से क्या कहा?
उत्तर देखने के लिए लॉग इन करें
अपना उत्तर लिखें और हमारे उत्तर से मिलाएँ — मुफ़्त।
लॉग इन करेंनए हैं? मुफ़्त अकाउंट बनाएँNCERT reference: chapter PDF page 3.
03 · समझें
शेख अयाज़ के पिता की करुणा
सिंधी कवि शेख अयाज़ ने अपनी आत्मकथा में अपने पिता से जुड़ी एक मर्मस्पर्शी घटना का वर्णन किया है।
एक दिन शेख अयाज़ के पिता कुएँ से नहाकर लौटे। जब वे भोजन करने बैठे, तो उनकी नज़र अपनी बाजू पर रेंगते हुए एक काले च्योंटे (बड़ी चींटी) पर पड़ी। वे तुरंत भोजन छोड़कर खड़े हो गए। जब उनकी पत्नी ने पूछा कि क्या भोजन अच्छा नहीं लगा, तो उन्होंने उत्तर दिया कि उन्होंने एक 'घर वाले' को बेघर कर दिया है।
वे उस च्योंटे को वापस कुएँ पर छोड़ने गए ताकि वह अपने घर पहुँच सके। यह घटना दर्शाती है कि पहले के लोग एक छोटे से कीड़े के प्रति भी इतने संवेदनशील थे कि उसे उसके घर से दूर करना उन्हें पाप लगता था। लेखक यहाँ 'घर वाले' शब्द का प्रयोग च्योंटे के लिए करके उसे मनुष्य के समान ही सम्मान देते हैं।
रुकें और सोचें
पहले खुद सोचें। अपना उत्तर लिखने और जाँचने के लिए मुफ़्त अकाउंट चाहिए।
प्रश्न
शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर क्यों उठ गए?
उत्तर देखने के लिए लॉग इन करें
अपना उत्तर लिखें और हमारे उत्तर से मिलाएँ — मुफ़्त।
लॉग इन करेंनए हैं? मुफ़्त अकाउंट बनाएँNCERT reference: chapter PDF page 4.
04 · समझें
पैगंबर नूह और घायल कुत्ता
लेखक नूह के प्रसंग के माध्यम से यह बताते हैं कि ईश्वर की बनाई हर रचना का अपना महत्व है और किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।
पाठ में नूह की धार्मिक कथा सुनाई गई है। इसमें घायल कुत्ते को दुत्कारने पर हुए पश्चाताप से उनके लगातार रोने और “नूह” कहलाने को जोड़ा गया है। यह लेखक द्वारा प्रस्तुत कथा है, नाम की वैज्ञानिक या ऐतिहासिक व्युत्पत्ति का दावा नहीं।
कुत्ते ने उन्हें उत्तर दिया कि न तो वह अपनी मर्जी से कुत्ता है और न ही नूह अपनी पसंद से इंसान हैं; हम सबको बनाने वाला एक ही ईश्वर है। यह सुनकर नूह को अपनी गलती का अहसास हुआ और वे पश्चाताप में उम्र भर रोते रहे। महाभारत में भी युधिष्ठिर के साथ अंत तक जाने वाला कुत्ता प्रतीकात्मक रूप से वफादारी और साथ का प्रतीक है।
रुकें और सोचें
पहले खुद सोचें। अपना उत्तर लिखने और जाँचने के लिए मुफ़्त अकाउंट चाहिए।
प्रश्न
नूह को 'नूह' के नाम से क्यों याद किया जाता है?
उत्तर देखने के लिए लॉग इन करें
अपना उत्तर लिखें और हमारे उत्तर से मिलाएँ — मुफ़्त।
लॉग इन करेंनए हैं? मुफ़्त अकाउंट बनाएँNCERT reference: chapter PDF page 4.
