Class 10 · Hindi · Chapter 5 · NCERT Class 10 Hindi – Kshitij Bhag 2

यह दंतुरित मुस्कान और फसल कक्षा 10 नोट्स

मुफ़्त: पूरा माइंड मैप और अध्याय के पहले 4 भाग। बाकी 3 भाग मुफ़्त अकाउंट से।

माइंड मैप

पूरे अध्याय की मुख्य बातें एक नज़र में।

यह दंतुरित मुस्कान और फसल

नागार्जुन की ये कविताएँ शिशु की निश्छल मुस्कान के जादुई प्रभाव और कृषि संस्कृति में प्रकृति-मानव के सामूहिक योगदान को रेखांकित करती हैं।

  1. कवि नागार्जुन: आधुनिक कबीर

    जनकवि नागार्जुन अपनी बेबाकी और सामाजिक सरोकारों के लिए जाने जाते हैं।

    • साहित्यिक पहचान — मैथिली में 'यात्री' नाम से लेखन और हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभ।
    • स्वभाव और कृतियाँ — घुमक्कड़ी स्वभाव; प्रमुख रचनाएँ 'युगधारा' और 'सतरंगे पंखों वाली' हैं।
  2. मुस्कान का जादुई प्रभाव

    शिशु की मुस्कान मृतप्राय और कठोर हृदयों में भी जीवन का संचार कर देती है।

    • मृतक में जान — निराशा से जड़ हो चुके लोगों के भीतर भी जीवन की उमंग भर देना।
    • पाषाण का पिघलना — कठोर हृदय वाले व्यक्ति का भी बच्चे के स्पर्श से भावुक और कोमल हो जाना।
  3. अपरिचित पिता और माँ

    कवि स्वयं को 'चिर प्रवासी' मानकर बच्चे के लिए अजनबी होने की बात करते हैं।

    • माँ का माध्यम — माँ ही वह कड़ी है जिसने कवि को बच्चे की मुस्कान देखने का अवसर दिया।
    • मधुपर्क और आत्मीयता — माँ का प्रेम पंचामृत के समान है जो बच्चे को मिठास और संस्कार देता है।
  4. काव्य बिंब और सौंदर्य

    कविता में दृश्य और गतिशील बिंबों का सुंदर प्रयोग किया गया है।

    • झोपड़ी में कमल — धूल से सने बच्चे की तुलना अभावों के बीच खिले सुंदर जलजात (कमल) से।
    • बाँस और बबूल — नीरस और कठोर स्वभाव वाले व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त प्रतीक।
  5. फसल: सामूहिक सृजन

    फसल किसी एक तत्व की नहीं, बल्कि अनेक प्राकृतिक और मानवीय कारकों की परिणति है।

    • मानवीय श्रम की गरिमा — लाखों-करोड़ों हाथों का स्पर्श और किसानों का कठिन परिश्रम।
    • मिट्टी का गुण-धर्म — विभिन्न मिट्टियों के पोषक तत्व जो फसल के रंग और स्वाद को तय करते हैं।
  6. प्रकृति का योगदान

    सूर्य, हवा और जल के रूपांतरण से ही फसल का अस्तित्व संभव है।

    • धूप का रूपांतरण — सूर्य की किरणों की ऊर्जा का अन्न के दानों में समाहित होना।
    • हवा की थिरकन — हवा का गतिशील योगदान जो फसल की हलचल में दिखाई देता है।

अध्याय के नोट्स

कवि नागार्जुन की दो प्रसिद्ध कविताएँ: 'यह दंतुरित मुस्कान' में एक नन्हे शिशु की मोहक मुस्कान का मानवीय प्रभाव और 'फसल' में प्रकृति एवं मानवीय श्रम के सुंदर समन्वय का वर्णन।

कवि परिचय: नागार्जुन

नागार्जुन (1911-1998) हिंदी और मैथिली साहित्य के एक प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्हें 'आधुनिक कबीर' भी कहा जाता है।

नागार्जुन का जन्म बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में प्राप्त की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए बनारस और कोलकाता गए। वे घुमक्कड़ी स्वभाव के थे और उन्होंने संपूर्ण भारत की अनेक बार यात्रा की।

वे जन-जीवन से गहरे सरोकार रखने वाले कवि थे। उन्होंने भ्रष्टाचार, राजनीतिक स्वार्थ और समाज की पतनशील स्थितियों पर तीखा प्रहार किया। उनकी कविताओं में छंदबद्ध और मुक्त छंद, दोनों ही शैलियाँ मिलती हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'युगधारा', 'सतरंगे पंखों वाली' और 'हज़ार-हज़ार बाँहों वाली' शामिल हैं।

नागार्जुन मैथिली में यात्री नाम से भी लिखते थे। इस परिचय से उनकी साहित्यिक पहचान और भाषा-संसार को समझने में सहायता मिलती है।

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प्रश्न

नागार्जुन को 'आधुनिक कबीर' क्यों कहा जाता है?

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यह दंतुरित मुस्कान: जीवन का संदेश

इस कविता में कवि ने एक छोटे बच्चे के नए-नए निकले दाँतों वाली मुस्कान के सौंदर्य और उसके जादुई प्रभाव का वर्णन किया है।

कवि कहते हैं कि बच्चे की यह 'दंतुरित मुस्कान' (छोटे-छोटे नए दाँतों वाली हँसी) इतनी प्रभावशाली है कि यह किसी मृतक में भी जान डाल सकती है। यहाँ 'मृतक' शब्द का प्रयोग कवि ने उन लोगों के लिए किया है जो जीवन की निराशा और हताशा के कारण जड़ हो चुके हैं। बच्चे की मुस्कान देखकर उनके भीतर भी जीवन का संचार हो जाता है।

कवि ने बच्चे के धूल से सने शरीर (धूलि-धूसर गात) की तुलना तालाब छोड़कर झोपड़ी में खिले कमल (जलजात) से की है। यह बिंब दर्शाता है कि अभावों के बीच भी बच्चे की उपस्थिति खुशियाँ बिखेर देती है। कवि का मानना है कि बच्चे का स्पर्श इतना कोमल और प्राणवान है कि कठोर पत्थर (पाषाण) जैसा हृदय भी पिघलकर जल बन जाए।

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बच्चे की मुस्कान का 'कठोर पाषाण' पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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NCERT reference: chapter PDF pages 2, 3.

अपरिचित पिता और माँ का माध्यम

कवि स्वयं को एक 'अतिथि' और 'चिर प्रवासी' मानते हैं, जो अपने ही बच्चे के लिए अनजान है।

कवि लंबे समय तक घर से बाहर रहने के कारण बच्चे के लिए एक अजनबी की तरह हैं। बच्चा उन्हें पहचान नहीं पाता और अपलक (अनिमेष) देखता रहता है। कवि को लगता है कि यदि माँ माध्यम न बनी होती, तो वे अपने ही बच्चे की इस सुंदर मुस्कान को कभी देख और जान नहीं पाते।

यहाँ माँ के प्रेम को 'मधुपर्क' (पंचामृत) के समान बताया गया है, जो बच्चे को आत्मीयता और जीवन की मिठास प्रदान करता है। जब बच्चा तिरछी नज़रों (कनखी) से कवि को देखता है और दोनों की आँखें मिलती हैं (आँखें चार होना), तब उसकी मुस्कान कवि के हृदय को मोह लेती है और उसे अत्यंत 'छविमान' (सुंदर) लगती है।

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प्रश्न

कवि ने स्वयं को 'अतिथि' क्यों कहा है?

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NCERT reference: chapter PDF pages 4, 7.

काव्य सौंदर्य और शिल्प

कविता की भाषा सरल, सहज और बिंबों से सजी हुई है।

शिशु के धूल से सने शरीर और झोपड़ी में कमल खिलने की कल्पना से दृश्य-बिंब बनते हैं। मुसकान कठोरता को कोमलता में बदलती हुई दिखाई देती है। बाँस-बबूल और शेफालिका के फूलों के विरोधी बिंब नीरसता से आनंद की ओर बदलाव को स्पष्ट करते हैं। बिना स्पष्ट प्रमाण हर बिंब को किसी एक अलंकार का नाम देना आवश्यक नहीं है।

कविता का स्वर वात्सल्य रस से ओत-प्रोत है। कवि ने 'दंतुरित मुस्कान' को जीवन की जीवंतता का प्रतीक माना है। भाषा में तत्सम शब्दों के साथ-साथ बोलचाल के शब्दों का भी सुंदर तालमेल है।

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शिशु के स्पर्श से 'बाँस और बबूल' का क्या अर्थ है?

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आगे का अध्याय

यह दंतुरित मुस्कान और फसल — बाकी अध्याय मुफ़्त में पढ़ें

  1. Locked: 1. फसल: प्रकृति और श्रम का योग
  2. Locked: 2. प्रकृति और मनुष्य का सहयोग
  3. Locked: 3. उत्तर-लेखन कला: एक उदाहरण

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