7 October 20267 min readBy Learnijoy Team
अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले कक्षा 10: सार और प्रश्न
निदा फ़ाज़ली के पाठ का पूरा सार, सभी प्रसंग क्रम से, पाठ का संदेश और परीक्षा के लिए उपयोगी प्रश्न-उत्तर।
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श भाग 2 का अध्याय 12 "अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले" (Ab Kahan Doosre Ke Dukh Se Dukhi Hone Wale) निदा फ़ाज़ली का लिखा पाठ है। इस लेख में आप पाठ का शुरू से अंत तक सार, उसके सभी प्रसंग, पाठ का संदेश और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे। यह पाठ मनुष्य की बढ़ती स्वार्थपरता और प्रकृति के प्रति उसकी संवेदनहीनता को दिखाता है और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का महत्व समझाता है।
पाठ की शुरुआत: धरती सबकी है
लेखक कहते हैं कि यह धरती केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि उन सभी जीवधारियों की है जिन्हें कुदरत ने जन्म दिया है। शुरू में मनुष्य, पशु-पक्षी, नदियाँ और पर्वत एक परिवार की तरह मिल-जुलकर रहते थे। पर मनुष्य ने अपनी बुद्धि से धीरे-धीरे पूरी धरती पर एकाधिकार जमा लिया और दूसरे जीवों को उनके घरों से बेदखल कर दिया। आज मनुष्य दूसरे जीवों के प्रति ही नहीं, अपनी ही जाति के सुख-दुख के प्रति भी संवेदनहीन हो गया है।
करुणा के तीन प्रसंग
सुलेमान और चींटियाँ: बाइबिल और कुरान में वर्णित सुलेमान (सोलोमेन) पशु-पक्षियों की भाषा समझने वाले राजा बताए गए हैं। एक बार वे अपनी सेना के साथ रास्ते से गुज़र रहे थे। घोड़ों की टापों की आवाज़ सुनकर चींटियाँ डरकर बिलों की ओर भागीं। सुलेमान ने उनकी घबराहट समझी, रुके और कहा कि डरो मत, खुदा ने मुझे सबका रखवाला बनाया है; मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं, सबके लिए मुहब्बत हूँ। चींटियों ने उनके लिए दुआ की और वे आगे बढ़ गए। सीख: शक्तिशाली व्यक्ति को छोटे से छोटे जीव के प्रति भी दयालु होना चाहिए।
शेख अयाज़ के पिता: सिंधी कवि शेख अयाज़ ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि एक दिन उनके पिता कुएँ से नहाकर लौटे और भोजन करने बैठे। तभी उनकी बाजू पर एक काला च्योंटा रेंगता दिखा। वे भोजन छोड़कर उठ गए। पत्नी ने पूछा कि क्या खाना अच्छा नहीं लगा, तो बोले कि मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। वे च्योंटे को वापस कुएँ पर छोड़ने गए। च्योंटे को घर वाला कहना उसे मनुष्य जैसा सम्मान देना है।
नूह और घायल कुत्ता: पाठ में नूह की धार्मिक कथा आती है। उन्होंने एक घायल कुत्ते को दुत्कार दिया। कुत्ते ने कहा कि न मैं अपनी मर्ज़ी से कुत्ता हूँ, न तुम अपनी पसंद से इंसान हो; हम सबको बनाने वाला एक ही है। यह सुनकर नूह को अपनी गलती का अहसास हुआ और वे पश्चाताप में उम्र भर रोते रहे। लेखक उनके नूह कहलाने को इसी प्रसंग से जोड़ते हैं। पाठ में मिट्टी की छवि भी है: मरने के बाद सब मिट्टी में मिल जाते हैं और पहचानना असंभव हो जाता है कि कौन-सा अंश किसका है, इसलिए किसी को खुद को श्रेष्ठ और दूसरे को तुच्छ नहीं समझना चाहिए।
प्रकृति का असंतुलन
लेखक बढ़ती आबादी, जंगलों की कटाई, समुद्र पर अतिक्रमण और प्रदूषण को प्रकृति के संतुलन पर दबाव मानते हैं। प्रकृति की सहनशक्ति की एक सीमा है; जब मनुष्य की दखलंदाज़ी हद से बढ़ जाती है, तो प्रकृति रौद्र रूप दिखाती है। लेखक ने मुंबई (बंबई) के उस तूफान का उदाहरण दिया है, जिसमें समुद्र ने तीन बड़े जहाज़ों को उठाकर अलग-अलग दिशाओं में फेंक दिया था।
| कारण | परिणाम |
|---|---|
| बढ़ती आबादी | समुद्र का सिमटना, पेड़ों का कटना |
| प्रदूषण | पक्षियों का बस्तियों से पलायन |
| बारूदी विनाश | वातावरण में असंतुलन |
| प्रकृति से छेड़छाड़ | बेवक्त बारिश, तूफान और नए रोग |
लेखक की माँ और आज का बदला हुआ समय
माँ की सीख: लेखक की माँ कहती थीं कि सूरज ढलने पर पेड़ों से पत्ते मत तोड़ो, दीया-बत्ती के समय फूल मत तोड़ो, दरिया को सलाम करो और कबूतरों व मुर्गों को मत सताओ। एक बार ग्वालियर वाले घर में कबूतर के दो अंडे थे। बिल्ली ने एक अंडा तोड़ दिया। माँ ने दूसरा बचाने की कोशिश की, पर वह उनके हाथ से गिरकर टूट गया। इस गुनाह के प्रायश्चित के लिए माँ ने पूरे दिन का रोज़ा रखा और खुदा से माफ़ी माँगती रहीं।
आज का समय: लेखक ने महसूस किया कि ग्वालियर से मुंबई तक दुनिया बहुत बदल गई है। जहाँ जंगल थे, वहाँ अब ऊँची इमारतें और बस्तियाँ हैं, जिन्होंने पक्षियों के घर छीन लिए। जो पक्षी शहर छोड़कर नहीं जा सके, वे इंसानों के घरों में डेरा डालने को मजबूर हैं। लेखक के फ्लैट में कबूतरों ने घोंसला बनाया। उनके आने-जाने से चीज़ें टूटतीं और वे लाइब्रेरी में घुसकर किताबें खराब करते। पाठ में इसे कबीर और मिर्ज़ा ग़ालिब को सताना कहा गया है, यानी उनकी किताबों से छेड़छाड़। तंग आकर लेखक की पत्नी ने जाली लगवा दी और खिड़की बंद कर दी। अब दोनों कबूतर बाहर रात भर खामोश और उदास बैठे रहते हैं। लेखक दुखी हैं कि अब न सुलेमान जैसा कोई है जो उनकी भाषा समझे, न उनकी माँ जैसी कोई जो उनके दुख में रात भर इबादत करे।
पाठ का संदेश
- धरती पर सभी जीवों का समान अधिकार है।
- हमें छोटे से छोटे जीव के प्रति भी करुणा रखनी चाहिए।
- सबका बनाने वाला एक है, इसलिए किसी को तुच्छ नहीं समझना चाहिए।
- प्रकृति से अधिक छेड़छाड़ विनाश लाती है; सह-अस्तित्व ज़रूरी है।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. लेखक के अनुसार धरती पर किसका अधिकार है? उत्तर: धरती पर उन सभी जीवधारियों का समान अधिकार है जिन्हें कुदरत ने जन्म दिया है, केवल मनुष्यों का नहीं।
प्रश्न 2. सुलेमान ने चींटियों से क्या कहा? उत्तर: उन्होंने कहा कि घबराओ मत, खुदा ने मुझे सबका रखवाला बनाया है; मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं, सबके लिए मुहब्बत हूँ।
प्रश्न 3. शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर क्यों उठ गए? उत्तर: उनकी बाजू पर एक काला च्योंटा रेंग रहा था। उन्हें लगा कि उन्होंने उसे कुएँ से लाकर बेघर कर दिया है, इसलिए वे उसे वापस उसके घर छोड़ने गए।
प्रश्न 4. कुत्ते ने नूह को क्या उत्तर दिया और उसका क्या प्रभाव पड़ा? उत्तर: कुत्ते ने कहा कि न वह अपनी मर्ज़ी से कुत्ता है, न नूह अपनी पसंद से इंसान; सबको बनाने वाला एक ही है। यह सुनकर नूह को गलती का अहसास हुआ और वे पश्चाताप में उम्र भर रोते रहे।
प्रश्न 5. प्रकृति के गुस्से का कौन-सा नमूना मुंबई में देखने को मिला? उत्तर: समुद्र के तूफान ने तीन बड़े जहाज़ों को उठाकर अलग-अलग दिशाओं में फेंक दिया। लेखक इसे प्रकृति की शक्ति की याद दिलाने वाले उदाहरण के रूप में रखते हैं।
प्रश्न 6. लेखक की माँ ने रोज़ा क्यों रखा? उत्तर: उनके हाथ से कबूतर का एक अंडा गलती से गिरकर टूट गया था। इस अनजाने गुनाह के प्रायश्चित और खुदा से माफ़ी माँगने के लिए उन्होंने पूरे दिन का रोज़ा रखा।
प्रश्न 7. लेखक की पत्नी ने खिड़की पर जाली क्यों लगवाई? उत्तर: कबूतरों के बार-बार आने-जाने से घर की चीज़ें टूट रही थीं और वे लाइब्रेरी में घुसकर किताबें खराब कर रहे थे। इस रोज़ की परेशानी से तंग आकर पत्नी ने जाली लगवा दी।
प्रश्न 8. पाठ में मिट्टी की छवि क्या समझाती है? उत्तर: मिट्टी नश्वर शरीर और सभी जीवों की साझी प्रकृति का प्रतीक है। मरने के बाद सब मिट्टी में मिल जाते हैं और पता नहीं चलता कि कौन-सा अंश किसका है। इसलिए जीते-जी भी किसी को श्रेष्ठ और किसी को तुच्छ नहीं समझना चाहिए।
उत्तर लिखते समय डेरा डालना मुहावरे का अर्थ अस्थायी निवास के रूप में स्पष्ट करें, जो पक्षियों की लाचारी दिखाता है। पूरा पाठ NCERT की पाठ्यपुस्तक में पढ़ा जा सकता है। इस पाठ के सभी प्रसंग क्रम से याद करने के लिए Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।