7 October 20267 min readBy Learnijoy Team

डायरी का एक पन्ना कक्षा 10: स्पर्श अध्याय 9 सार और प्रश्न-उत्तर

26 जनवरी 1931 के कलकत्ता का आँखों देखा वर्णन: पूरा सार, प्रमुख व्यक्ति, पाठ का संदेश और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर।

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श भाग 2 का अध्याय 9 "डायरी का एक पन्ना" (Diary Ka Ek Panna) सीताराम सेकसरिया की डायरी से लिया गया पाठ है। इस लेख में आप 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में हुई घटनाओं का पूरा सार, पाठ के प्रमुख व्यक्ति, पाठ का संदेश और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे। उस दिन कलकत्ता के लोगों ने ब्रिटिश दमन के बावजूद भारत का दूसरा स्वतंत्रता दिवस मनाया था।

लेखक परिचय: सीताराम सेकसरिया

सीताराम सेकसरिया (1892-1982) स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनका जन्म राजस्थान के नवलगढ़ में हुआ, पर अधिकांश जीवन कलकत्ता (अब कोलकाता) में बीता। वे व्यापार से जुड़े थे और कई साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के संस्थापक भी रहे।

महात्मा गांधी के आह्वान पर वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े, आज़ाद हिंद फ़ौज के मंत्री के रूप में काम किया और जेल यात्राएँ भी कीं। उनकी महत्वपूर्ण कृति दो भागों में 'एक कार्यकर्ता की डायरी' है, जिससे यह पाठ लिया गया है। यह डायरी एक कार्यकर्ता की नज़र से स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं का आँखों देखा विवरण देती है।

पृष्ठभूमि: 26 जनवरी का महत्व

26 जनवरी 1930 को गुलाम भारत में पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। 1931 में इसी दिन उसकी पहली वर्षगांठ थी, जिसे पाठ में 'पुनरावृत्ति' कहा गया है। कलकत्ता पर अक्सर आरोप लगता था कि वहाँ आंदोलन का पर्याप्त काम नहीं हो रहा। इस आयोजन का एक उद्देश्य यह कलंक धोना भी था। इसलिए तैयारी बहुत बड़े स्तर पर हुई; लेखक के अनुसार केवल प्रचार में ही दो हज़ार रुपये खर्च हुए थे।

पाठ का सार: सुबह से शाम तक

सजा हुआ शहर, घिरे हुए मैदान: बड़ा बाज़ार के मकानों पर राष्ट्रीय झंडे फहरा रहे थे। कई मकान इतने सुंदर सजे थे कि लगता था मानो स्वतंत्रता मिल गई हो। दूसरी ओर, घुड़सवार पुलिस और सार्जेंट हर मोड़ पर तैनात थे। पुलिस ने सुबह से ही बड़े पार्क और मैदान घेर लिए थे, ताकि लोग इकट्ठा होकर सभा न कर सकें और झंडा न फहरा सकें।

सुबह की घटनाएँ: श्रद्धानंद पार्क में बंगाल प्रांतीय विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने झंडा गाड़ा, तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और लोगों पर लाठियाँ चलाईं। तारा सुंदरी पार्क में भी झंडा फहराने की कोशिश में काफी मारपीट हुई। मारवाड़ी बालिका विद्यालय की लड़कियों ने अपने विद्यालय में झंडोत्सव मनाया, जहाँ जानकीदेवी और मदालसा भी मौजूद थीं। लड़कियों को उत्सव का महत्व समझाया गया।

खुली चुनौती: पुलिस कमिश्नर ने नोटिस निकाला कि सभा करना कानूनी अपराध है और शामिल होने वाले दोषी माने जाएँगे। जवाब में कौंसिल ने नोटिस निकाला कि मोनुमेंट के नीचे ठीक 4:24 बजे झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी, जिसमें जनता आमंत्रित है। लेखक इसे 'ओपन लड़ाई' कहते हैं।

जुलूस, लाठीचार्ज और महिलाओं का साहस

ठीक 4:10 बजे सुभाष बाबू जुलूस लेकर आए। चौरंगी पर पुलिस ने रोकने की कोशिश की, पर भीड़ के दबाव से जुलूस आगे बढ़ गया। मैदान के मोड़ पर पुलिस ने भयानक लाठीचार्ज किया। सुभाष बाबू पर भी लाठियाँ पड़ीं, पर वे ज़ोर-ज़ोर से 'वंदे मातरम्' बोलते रहे। क्षितीश चटर्जी जैसे कई कार्यकर्ताओं के सिर फट गए, फिर भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ।

जब पुरुषों पर लाठियाँ चल रही थीं, तब महिलाएँ मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़ गईं, झंडा फहराया और प्रतिज्ञा पढ़ी। महिलाओं के एक भाग का नेतृत्व विमल प्रतिभा कर रही थीं; बहू बाज़ार के मोड़ पर रोके जाने पर वे वहीं बैठ गईं। पुलिस ने महिलाओं को गिरफ्तार करके लालबाज़ार लॉकअप भेजा। कुल 105 महिलाएँ गिरफ्तार हुईं, जो कलकत्ता के इतिहास में एक रिकॉर्ड था। रात 9 बजे उन्हें रिहा किया गया।

परिणाम: अस्पतालों की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 160 घायल वहाँ पहुँचे, जबकि कई लोग अपने घर चले गए। लेखक का अनुमान है कि कम से कम 200 लोग घायल हुए। सुभाष बाबू को गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप भेजा गया। डॉ. दासगुप्ता घायलों के फोटो खिंचवा रहे थे। लेखक के अनुसार यह दिन 'अपूर्व' था और कलकत्ता पर लगा कलंक काफी हद तक धुल गया।

पाठ के प्रमुख व्यक्ति

व्यक्तिपाठ में भूमिका
सुभाष बाबू (सुभाष चंद्र बोस)जुलूस का नेतृत्व; लाठियाँ खाकर भी 'वंदे मातरम्' बोलते रहे
अविनाश बाबूश्रद्धानंद पार्क में झंडा गाड़ा, गिरफ्तार हुए
क्षितीश चटर्जीलाठीचार्ज में सिर फटा
विमल प्रतिभामहिलाओं के एक भाग का नेतृत्व
जानकीदेवी और मदालसामारवाड़ी बालिका विद्यालय के झंडोत्सव में मौजूद
डॉ. दासगुप्ताघायलों के फोटो खिंचवा रहे थे

पाठ का संदेश

  • संगठित होकर लोग किसी भी दमन का सामना कर सकते हैं; उस दिन लोगों को यही विश्वास मिला।
  • स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं और बच्चों की भी सक्रिय भागीदारी थी।
  • पुलिस की पाबंदी और लाठियाँ लोगों के उत्साह को नहीं दबा सकीं।
  • डायरी विधा इतिहास का सजीव, आँखों देखा चित्र देती है।

महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों खास था? उत्तर: 26 जनवरी 1930 को पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। 1931 में उसकी पहली वर्षगांठ थी, यानी दूसरा स्वतंत्रता दिवस। कलकत्ता के लोगों के लिए यह अपने ऊपर लगे कलंक को धोने का अवसर भी था।

प्रश्न 2. पुलिस ने पार्कों और मैदानों को क्यों घेरा था? उत्तर: लोगों को सभा करने और झंडा फहराने से रोकने के लिए, ताकि आंदोलन को दबाया जा सके।

प्रश्न 3. अविनाश बाबू के साथ पुलिस ने क्या किया? उत्तर: अविनाश बाबू ने श्रद्धानंद पार्क में झंडा गाड़ा, तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और वहाँ मौजूद लोगों को मारा-पीटा।

प्रश्न 4. लेखक ने शाम की सभा को 'ओपन लड़ाई' क्यों कहा? उत्तर: पुलिस कमिश्नर ने सभा को अपराध घोषित किया था, फिर भी कौंसिल ने नोटिस निकालकर समय और स्थान बताते हुए खुलेआम सभा की घोषणा की। यह ब्रिटिश सत्ता को सीधी और खुली चुनौती थी।

प्रश्न 5. लाठीचार्ज के समय सुभाष बाबू की क्या प्रतिक्रिया थी? उत्तर: लाठियाँ पड़ने पर भी सुभाष बाबू साहस के साथ ज़ोर-ज़ोर से 'वंदे मातरम्' बोलते रहे और पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ने पर अड़े रहे।

प्रश्न 6. जुलूस में महिलाओं की क्या भूमिका थी? उत्तर: महिलाओं ने जुलूस में भाग लिया, मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया, प्रतिज्ञा पढ़ी और गिरफ्तारी दी। कुल 105 महिलाएँ गिरफ्तार हुईं। यह उनके अदम्य साहस का परिचय था।

प्रश्न 7. डॉ. दासगुप्ता घायलों के फोटो क्यों खिंचवा रहे थे? उत्तर: ताकि पुलिस की बर्बरता का दस्तावेजी साक्ष्य रहे और ब्रिटिश दमन की सच्चाई सबके सामने लाई जा सके।

प्रश्न 8. लेखक ने इस दिन को 'अपूर्व' क्यों कहा? उत्तर: क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का अपने-आप बाहर निकलना, पुलिस का मुकाबला करना और महिलाओं की इतनी बड़ी भागीदारी पहले कभी नहीं देखी गई थी। इससे कलकत्ता पर लगा कलंक काफी हद तक धुल गया।

उत्तर लिखने का तरीका

बड़े प्रश्न, जैसे "सिद्ध कीजिए कि 26 जनवरी 1931 कलकत्ता के लिए गर्व का दिन था", में पहले दावा लिखें, फिर पाठ से साक्ष्य दें— पाबंदी के बावजूद लोगों का जुटना, महिलाओं का झंडा फहराना, 105 महिलाओं की गिरफ्तारी, लगभग 200 घायल। अंत में व्याख्या करें कि पुलिस का दमन लोगों का उत्साह नहीं दबा सका।

पूरा पाठ NCERT की पाठ्यपुस्तक में पढ़ा जा सकता है। इस पाठ की घटनाएँ क्रम से याद करने के लिए Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।