7 October 20266 min readBy Learnijoy Team
मीरा के पद कक्षा 10: भावार्थ और प्रश्न-उत्तर (स्पर्श अध्याय 2)
मीराबाई के दोनों पदों का सरल भावार्थ, कृष्ण-भक्ति का भाव, राजस्थानी शब्दों के अर्थ और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर।
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श भाग 2 का अध्याय 2 मीरा के पद (Meera ke Pad) है। इसमें मीराबाई के दो पद हैं: पहले में वे कृष्ण से अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं, और दूसरे में उनकी चाकर (दासी) बनकर पास रहने की इच्छा जताती हैं। इस लेख में आप दोनों पदों का भावार्थ, कठिन शब्द, भाषा-शैली और प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे।
कवयित्री परिचय: मीराबाई
- मीराबाई मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख कवयित्री थीं।
- उनका जन्म 1503 में जोधपुर के चौकड़ी (कुड़की) गाँव में हुआ था।
- उनका विवाह मेवाड़ के महाराणा सांगा के पुत्र कुँवर भोजराज से हुआ था।
- उनका जीवन दुखों से भरा रहा। बचपन में माँ का देहांत हुआ, और विवाह के कुछ वर्षों बाद पति, पिता और ससुर का भी देहांत हो गया।
- सांसारिक जीवन से निराश होकर वे घर-परिवार छोड़कर वृंदावन में बस गईं और पूरी तरह गिरधर गोपाल कृष्ण को समर्पित हो गईं।
- वे संत रैदास की शिष्या मानी जाती हैं।
- उनकी भक्ति में दैन्य (स्वयं को छोटा मानना) और माधुर्य (प्रेम भाव) का मेल है।
पहला पद: 'हरो म्हारी भीर'
मीरा कृष्ण को हरि कहकर पुकारती हैं। वे कहती हैं कि जैसे आपने अपने दूसरे भक्तों के कष्ट दूर किए, वैसे ही मेरे कष्ट भी दूर कीजिए। इस विनती में कृष्ण की शक्ति पर उनका पूरा विश्वास दिखता है। अपनी बात पक्की करने के लिए वे भक्तिपरंपरा के तीन प्रसंग याद करती हैं:
| प्रसंग | पद में रक्षा का वर्णन |
|---|---|
| द्रौपदी | चीर (वस्त्र) बढ़ाकर अपमान से रक्षा की। |
| प्रह्लाद | नरसिंह (नरहरि) रूप धारण कर हिरण्यकशिपु से रक्षा की। |
| गजराज | मगरमच्छ के चंगुल से छुड़ाकर जीवन दिया। |
पाठ की शब्दार्थ सूची में गजराज का अर्थ ऐरावत दिया गया है। पद के अंत में मीरा स्वयं को गिरधर की दासी बताकर कहती हैं, 'हरो म्हारी भीर', यानी मेरी पीड़ा भी दूर करो। यहाँ भीर का अर्थ कष्ट या दुख है।
काव्य-सौंदर्य: 'काटी कुंजर' में अनुप्रास अलंकार है। भाषा सरल राजस्थानी मिश्रित ब्रज है और शैली विनीत प्रार्थना की है।
दूसरा पद: 'स्याम म्हाने चाकर राखो जी'
मीरा कहती हैं, हे श्याम, मुझे अपनी दासी बना लीजिए। वे सेवा इसलिए करना चाहती हैं ताकि हर समय कृष्ण के दर्शन पा सकें। चाकर बनकर वे बाग लगाएँगी, ताकि जब कृष्ण वहाँ टहलने आएँ तो रोज़ सुबह उनके दर्शन हों। वे वृंदावन की कुंज गलियों में कृष्ण की लीलाओं का गुणगान करना चाहती हैं।
मीरा नौकरी की भाषा को भक्ति का रूप देती हैं। उन्हें धन नहीं चाहिए:
| सेवा से जुड़ा शब्द | मीरा का भाव |
|---|---|
| पारिश्रमिक (वेतन) | कृष्ण के दर्शन |
| खर्ची | कृष्ण का स्मरण |
| जागीर | भाव-भक्ति |
कृष्ण का रूप और मिलन की व्याकुलता
कृष्ण का रूप: कृष्ण के सिर पर मोर मुकुट है, शरीर पर पीले वस्त्र (पीतांबर) हैं और गले में वैजयंती फूलों की माला है। वे वृंदावन में गायें चराते हैं और मधुर मुरली बजाकर सबका मन मोह लेते हैं। मीरा उन्हें 'मोहन मुरली वाला' कहकर पुकारती हैं।
मीरा की इच्छाएँ: वे ऊँचे-ऊँचे महलों के बीच-बीच में खिड़कियाँ (बारी) बनवाने और कुसुम्बी (लाल) रंग की साड़ी पहनकर अपने साँवरिया के दर्शन करने की बात कहती हैं।
मिलन की तड़प: मीरा विनती करती हैं कि कृष्ण आधी रात को यमुना के किनारे (तीरां) दर्शन दें। उनका हृदय (हिवड़ो) गिरधर नागर से मिलने के लिए बहुत अधीर (अधीरा) है। यहाँ भक्त की अधीरता और प्रेम की पराकाष्ठा दिखती है।
भाषा, शैली और कठिन शब्द
- भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रज है। 'म्हाने', 'राखो', 'पाँस्यूँ' जैसे शब्द राजस्थानी प्रभाव दिखाते हैं। मीरा की भाषा में गुजराती, पंजाबी, खड़ी बोली और पूर्वी हिंदी के शब्द भी मिलते हैं।
- पदों में गेयता है; ये अलग-अलग रागों में गाए जा सकते हैं।
- रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सहज प्रयोग है।
- शैली में समर्पण, प्रेम और उलाहना (शिकायत) तीनों हैं। वे कृष्ण को उनका कर्तव्य याद दिलाती हैं और लाड भी लड़ाती हैं।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| भीर | पीड़ा, कष्ट |
| चीर | वस्त्र |
| कुंजर | हाथी |
| धर्यो | धारण किया |
| हिवड़ो | हृदय |
| घणो | बहुत अधिक |
| तीरां | किनारा |
| राखौ | रखिए |
| लगास्यूँ | लगाऊँगी |
याद रखें
- पहले पद में विनती है: मेरी पीड़ा हरो।
- तीन प्रसंग: द्रौपदी, प्रह्लाद, गजराज।
- दूसरे पद में चाकरी की इच्छा: दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति ही वेतन है।
- मिलन का समय और स्थान: आधी रात, यमुना का किनारा।
- भक्ति का भाव: दैन्य और माधुर्य।
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 1)
प्रश्न 1. मीराबाई की भक्ति किस भाव की है? उत्तर: मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्य भाव की है। वे स्वयं को कृष्ण की दासी मानती हैं और उनसे प्रेमपूर्ण संबंध रखती हैं।
प्रश्न 2. मीरा ने द्रौपदी का उदाहरण क्यों दिया है? उत्तर: यह बताने के लिए कि कृष्ण भक्तों की पुकार सुनकर उनकी सहायता करते हैं और उनकी लाज की रक्षा करते हैं। द्रौपदी का चीर बढ़ाकर उन्होंने यही किया था, इसलिए मीरा को भरोसा है कि वे उसकी पीड़ा भी हरेंगे।
प्रश्न 3. 'काटी कुंजर पीर' का क्या अर्थ है? उत्तर: भगवान ने हाथी (गजराज) का कष्ट काटा, उसे मगरमच्छ के चंगुल से छुड़ाकर उसकी पीड़ा दूर की।
प्रश्न 4. मीरा कृष्ण की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? उत्तर: ताकि वे कृष्ण के पास रह सकें, उनके लिए बाग लगा सकें और रोज़ उनके दर्शन पा सकें।
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 2)
प्रश्न 5. मीरा ने कृष्ण के रूप का वर्णन कैसे किया है? उत्तर: कृष्ण के सिर पर मोर मुकुट, शरीर पर पीतांबर और गले में वैजयंती माला है। वे वृंदावन में गायें चराते हैं और मुरली बजाकर सबका मन मोहते हैं।
प्रश्न 6. मीरा कृष्ण से कब और कहाँ मिलना चाहती हैं? उत्तर: आधी रात के समय यमुना नदी के किनारे।
प्रश्न 7. मीरा भाव-भक्ति को क्या मानती हैं? उत्तर: वे भाव-भक्ति को अपनी सबसे बड़ी संपत्ति, यानी जागीर मानती हैं, जिसे वे कृष्ण की सेवा करके पाना चाहती हैं।
प्रश्न 8. मीराबाई कृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या करने को तैयार हैं? उत्तर: दावा: वे कृष्ण की निकटता के लिए हर तरह की सेवा और त्याग को तैयार हैं। प्रमाण: वे चाकर बनना चाहती हैं, बाग लगाना चाहती हैं, और कुसुम्बी साड़ी पहनकर आधी रात को यमुना किनारे प्रतीक्षा करने को तैयार हैं। व्याख्या: मीरा के लिए सामाजिक प्रतिष्ठा से ऊपर कृष्ण का साथ है; वे केवल दर्शन और भक्ति की जागीर चाहती हैं।
आम गलतियाँ
- दोनों पदों का भाव मिला देना। पहला पद पीड़ा हरने की प्रार्थना है, दूसरा चाकरी और दर्शन की इच्छा।
- पारिश्रमिक, खर्ची और जागीर को धन समझ लेना। मीरा के लिए ये दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति हैं।
- हिवड़ो, अधीरा जैसे शब्दों का अर्थ लिखे बिना व्याकुलता समझाना।
दोनों पदों का भावार्थ अपने शब्दों में दोहराना हो, तो Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।