7 October 20266 min readBy Learnijoy Team
यह दंतुरित मुस्कान और फसल कक्षा 10: भावार्थ, प्रश्न-उत्तर
नागार्जुन की दोनों कविताओं का सरल भावार्थ, बिंब और प्रतीक, कठिन शब्द और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर।
कक्षा 10 हिंदी क्षितिज भाग 2 के अध्याय 5 में नागार्जुन की दो कविताएँ हैं: यह दंतुरित मुस्कान और फसल (Yah Danturit Muskan aur Fasal)। पहली कविता एक नन्हे शिशु की मुस्कान का जादू दिखाती है, दूसरी बताती है कि फसल प्रकृति और मानव श्रम के मेल से बनती है। इस लेख में आप दोनों का भावार्थ, बिंब, कठिन शब्द और परीक्षा के लिए प्रश्न-उत्तर पढ़ेंगे।
कवि परिचय: नागार्जुन
- नागार्जुन (1911-1998) हिंदी और मैथिली साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्हें आधुनिक कबीर भी कहा जाता है।
- उनका जन्म बिहार के दरभंगा ज़िले के सतलखा गाँव में हुआ। मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था।
- प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में हुई; उच्च शिक्षा के लिए वे बनारस और कोलकाता गए।
- वे घुमक्कड़ स्वभाव के थे और उन्होंने पूरे भारत की कई बार यात्रा की।
- उन्होंने भ्रष्टाचार, राजनीतिक स्वार्थ और समाज की गिरती स्थितियों पर तीखा प्रहार किया। उनकी कविताओं में छंदबद्ध और मुक्त छंद, दोनों मिलते हैं।
- प्रमुख कृतियाँ: युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, हज़ार-हज़ार बाँहों वाली। मैथिली में वे यात्री नाम से भी लिखते थे।
यह दंतुरित मुस्कान: शिशु की मुस्कान का जादू
दंतुरित मुस्कान का अर्थ है नए-नए निकले छोटे दाँतों वाली हँसी। कवि कहते हैं कि यह मुस्कान इतनी प्रभावशाली है कि मृतक में भी जान डाल दे। यहाँ मृतक का अर्थ वे लोग हैं जो निराशा और हताशा से जड़ हो चुके हैं। बच्चे की मुस्कान देखकर उनमें भी जीवन लौट आता है।
बच्चे का धूल से सना शरीर (धूलि-धूसर गात) कवि को ऐसा लगता है मानो तालाब छोड़कर कमल (जलजात) उनकी झोपड़ी में खिल गया हो। यह बिंब बताता है कि अभावों के बीच भी बच्चा खुशियाँ बिखेर देता है। बच्चे का स्पर्श इतना कोमल और प्राणवान है कि पत्थर (पाषाण) जैसा कठोर हृदय भी पिघलकर जल बन जाए। कविता में बाँस-बबूल और शेफालिका के फूलों के विरोधी बिंब हैं, जो नीरसता से आनंद की ओर बदलाव दिखाते हैं। यानी बच्चे के स्पर्श से नीरस व्यक्ति भी आनंदित हो उठता है।
यह दंतुरित मुस्कान: अपरिचित पिता और माँ का माध्यम
कवि लंबे समय तक घर से बाहर रहे, इसलिए वे स्वयं को अतिथि और चिर प्रवासी कहते हैं। बच्चा उन्हें पहचानता नहीं और अपलक (अनिमेष) देखता रहता है। कवि मानते हैं कि अगर माँ माध्यम न बनती, तो वे अपने ही बच्चे की यह सुंदर मुस्कान न देख पाते, न जान पाते।
माँ का प्रेम मधुपर्क (पंचामृत) जैसा है, जो बच्चे को आत्मीयता और मिठास देता है। जब बच्चा कनखी (तिरछी नज़र) से कवि को देखता है और दोनों की आँखें चार होती हैं (आँखें मिलती हैं), तब वह मुस्कान कवि का मन मोह लेती है और उन्हें बहुत छविमान (सुंदर) लगती है।
काव्य-सौंदर्य: कविता में वात्सल्य रस है। भाषा सरल है, जिसमें तत्सम और बोलचाल के शब्दों का मेल है। धूल-सने शरीर और झोपड़ी में खिले कमल से दृश्य-बिंब बनते हैं।
फसल: प्रकृति और श्रम का योग
यह कविता हमें उपभोक्ता संस्कृति से दूर ले जाकर कृषि संस्कृति के करीब लाती है। कवि पूछते हैं, फसल क्या है? और स्वयं उत्तर देते हैं कि फसल केवल मिट्टी और बीज नहीं है:
| सहयोगी | कविता में योगदान |
|---|---|
| जल | अनेक नदियों के पानी का जादू फसल को सींचता है |
| मिट्टी | भूरी, काली, संदली मिट्टी का गुण-धर्म फसल में प्रकट होता है |
| धूप | सूरज की किरणों का रूपांतर अन्न में दिखता है |
| हवा | हवा की थिरकन फसल में समाई लगती है |
| किसान और मज़दूर | लाखों-करोड़ों हाथों के स्पर्श की गरिमा |
कवि का निष्कर्ष है कि फसल किसी एक तत्व की नहीं, अनेक तत्वों के सामूहिक सहयोग की उपज है।
फसल: बिंबों को समझें
सूरज की किरणें: पौधे प्रकाश-संश्लेषण में सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते हैं। यह संबंध बिंब को समझने में मदद करता है, पर कविता विज्ञान की प्रक्रिया का क्रमवार वर्णन नहीं है।
हवा की थिरकन: यह गतिशील बिंब है। हवा का स्पर्श और पौधों की हलचल फसल में समाई हुई लगती है। इसे हवा के सचमुच नाचने का वर्णन न समझें।
गुण-धर्म: हर मिट्टी की अपनी प्रकृति और पोषक तत्व होते हैं, जो बीज को अंकुरित करके फसल बनाते हैं।
याद रखें और कठिन शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दंतुरित | छोटे-छोटे नए दाँतों वाली |
| धूलि-धूसर गात | धूल से सना शरीर |
| जलजात | कमल |
| पाषाण | पत्थर |
| चिर प्रवासी | लंबे समय से घर से दूर रहने वाला |
| मधुपर्क | पंचामृत |
| कनखी | तिरछी नज़र |
| छविमान | सुंदर |
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 1)
प्रश्न 1. नागार्जुन को आधुनिक कबीर क्यों कहा जाता है? उत्तर: वे कबीर की तरह बेबाक और फक्कड़ थे, और समाज की कुरीतियों तथा भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार करते थे।
प्रश्न 2. बच्चे की मुस्कान का कठोर पाषाण पर क्या प्रभाव पड़ता है? उत्तर: बच्चे की मुस्कान और स्पर्श पत्थर जैसे कठोर हृदय वाले व्यक्ति को भी कोमल और भावुक बना देते हैं, मानो पत्थर पिघलकर जल बन गया हो।
प्रश्न 3. कवि ने स्वयं को अतिथि क्यों कहा है? उत्तर: लगातार यात्राओं के कारण कवि घर से दूर रहते थे, इसलिए अपने ही बच्चे के लिए मेहमान जैसे अपरिचित हो गए थे।
प्रश्न 4. बाँस और बबूल किसके प्रतीक हैं? उत्तर: नीरस और कठोर स्वभाव के। बच्चे के स्पर्श से ऐसा व्यक्ति भी आनंदित हो उठता है।
महत्त्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (भाग 2)
प्रश्न 5. कवि बच्चे की मुस्कान माँ के कारण ही देख पाए, कैसे? उत्तर: बच्चा कवि को पहचानता नहीं था। माँ ने माध्यम बनकर दोनों का परिचय कराया, तभी कवि बच्चे की मुस्कान देख और जान पाए।
प्रश्न 6. कवि ने फसल को हाथों के स्पर्श की गरिमा क्यों कहा है? उत्तर: फसल केवल प्राकृतिक साधनों से नहीं उगती। उसे तैयार करने में किसानों और मज़दूरों का कठिन परिश्रम और देखभाल भी लगती है।
प्रश्न 7. फसल कविता में मिट्टी के गुण-धर्म का क्या अर्थ है? उत्तर: मिट्टी के भीतर के वे पोषक तत्व और विशेषताएँ जो बीज को अंकुरित कर फसल का रूप देती हैं। भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण-धर्म वाक्यांश मिट्टी की अलग-अलग किस्मों की ओर संकेत करता है।
प्रश्न 8. फसल कविता का मुख्य संदेश क्या है? उत्तर: फसल जल, मिट्टी, धूप, हवा और मानवीय श्रम के सामूहिक सहयोग से बनती है। कविता हमें उपभोक्ता संस्कृति से हटाकर कृषि संस्कृति और श्रम के सम्मान की ओर ले जाती है।
आम गलतियाँ
- मृतक शब्द को शाब्दिक अर्थ में लेना। यहाँ यह निराश, जड़ हो चुके लोगों के लिए है।
- फसल को केवल किसान की मेहनत या केवल प्रकृति की देन बताना। कविता दोनों के मेल की बात करती है।
- हवा की थिरकन या सूरज के रूपांतर को विज्ञान की पूरी प्रक्रिया की तरह लिखना। ये काव्य-बिंब हैं।
दोनों कविताओं के बिंब फिर से समझने हों, तो Learnijoy पर Joy के साथ यह अध्याय पढ़ें।