02 · समझें
कस्बा और नेताजी की प्रतिमा
कहानी एक छोटे से कस्बे की है जहाँ नगरपालिका ने मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवाई थी।
कस्बा बहुत बड़ा नहीं था, वहाँ कुछ पक्के मकान, एक बाजार, लड़के-लड़कियों के स्कूल और एक सीमेंट का छोटा कारखाना था। नगरपालिका समय-समय पर छोटे-मोटे विकास कार्य करवाती रहती थी। इसी उत्साह में एक प्रशासनिक अधिकारी ने चौराहे पर नेताजी की प्रतिमा लगवाई।
प्रतिमा संगमरमर की थी और 'बस्ट' (टोपी से कोट के दूसरे बटन तक) के रूप में थी। नेताजी फौजी वर्दी में सुंदर और मासूम लग रहे थे। प्रतिमा को देखते ही 'दिल्ली चलो' जैसे नारे याद आने लगते थे, जो एक सफल कलाकृति की पहचान है।
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प्रश्न
नगरपालिका ने कस्बे के विकास के लिए क्या-क्या कार्य किए थे?
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03 · समझें
मूर्ति की कमी: चश्मा गायब
प्रतिमा सुंदर थी, लेकिन उसमें एक बड़ी कमी थी—नेताजी की आँखों पर संगमरमर का चश्मा नहीं था।
लेखक अनुमान लगाते हैं कि शायद बजट की कमी या अच्छे मूर्तिकार की जानकारी न होने के कारण स्थानीय ड्राइंग मास्टर 'मोतीलाल' को यह काम सौंपा गया होगा। मूर्तिकार ने महीने भर में मूर्ति तो बना दी, लेकिन वह पत्थर का पारदर्शी चश्मा बनाने में असफल रहा होगा या चश्मा टूट गया होगा।
हालाँकि मूर्ति पर पत्थर का चश्मा नहीं था, लेकिन किसी ने उस पर एक असली, चौड़ा काला फ्रेम वाला चश्मा पहना दिया था। जब हालदार साहब ने पहली बार इसे देखा, तो वे चकित रह गए और उनके चेहरे पर मुस्कान फैल गई कि 'मूर्ति पत्थर की, लेकिन चश्मा रियल'।
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प्रश्न
हालदार साहब को मूर्ति में क्या कमी खटकती थी?
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04 · समझें
कैप्टन चश्मेवाला और उसकी भावना
हालदार साहब को पानवाले से पता चला कि यह चश्मा बदलने का काम 'कैप्टन' नाम का एक व्यक्ति करता है।
कैप्टन कोई फौजी या आजाद हिंद फौज का सिपाही नहीं था, बल्कि एक बूढ़ा, मरियल और लंगड़ा व्यक्ति था जो फेरी लगाकर चश्मे बेचता था। उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति आहत करती थी, इसलिए वह अपनी दुकान के फ्रेमों में से एक मूर्ति पर फिट कर देता था।
जब कोई ग्राहक वैसा ही फ्रेम मांगता जो मूर्ति पर लगा है, तो कैप्टन नेताजी से क्षमा मांगते हुए वह फ्रेम उतारकर ग्राहक को दे देता और मूर्ति पर नया फ्रेम लगा देता। यह उसकी देशभक्ति का अनोखा तरीका था।
चश्मा बदलने की प्रक्रिया
- 1
संवेदना
कैप्टन को बिना चश्मे की मूर्ति अधूरी लगती है।
- 2
अर्पण
वह अपना एक फ्रेम मूर्ति को पहना देता है।
- 3
विनिमय
ग्राहक द्वारा वही फ्रेम मांगने पर वह उसे उतारकर ग्राहक को देता है।
- 4
प्रतिस्थापन
वह मूर्ति पर पुनः नया फ्रेम लगा देता है।
कैप्टन की देशभक्ति और उसके छोटे से व्यवसाय का समन्वय।
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प्रश्न
लोग चश्मेवाले को 'कैप्टन' क्यों कहते थे?
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